
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के इतिहास से जुड़ी एक खास घटना आज भी सुरक्षित दस्तावेजों में दर्ज है। 18 अक्तूबर 1861 को दिल्ली के सब्जी मंडी थाने में घरेलू सामान की चोरी की पहली प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। चोरी हुए सामान की कुल कीमत 45 आने यानी करीब 2.80 रुपये थी। इस ऐतिहासिक प्राथमिकी को आज भी सुरक्षित सहेजकर रखा गया है।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, चोरी हुए सामान में देगची, कटोरा, आइसक्रीम बनाने का सांचा और महिलाओं के कुछ कपड़े शामिल थे। उस समय इन सामानों की कुल कीमत 45 आने आंकी गई थी। यह मामला सब्जी मंडी थाने के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इलाके का था।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, उस दौर में दिल्ली पंजाब प्रांत का हिस्सा थी। यहां उर्दू और फारसी भाषाओं का प्रचलन था और पुलिस तथा अदालतों के दस्तावेजों में भी इन भाषाओं का इस्तेमाल किया जाता था।
ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता मैउद्दीन प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए इलाके के चौकीदार को साथ लेकर सब्जी मंडी थाने पहुंचे थे। उस समय आम लोगों में पुलिस के पास जाने को लेकर झिझक रहती थी और पढ़े-लिखे लोगों की संख्या भी कम थी। ऐसे में चौकीदार स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभाते थे।
दिल्ली पुलिस में ऐतिहासिक लेखों और दस्तावेजों को सुरक्षित रखने वाले एसीपी राजेंद्र सिंह कलकल ने बताया कि शिकायत किस परिस्थिति में दर्ज कराई गई थी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि, कुछ दस्तावेजों से पता चलता है कि उस समय किसी वारदात की सूचना पहले इलाके के चौकीदार को दी जाती थी।
बताया जाता है कि उस समय प्राथमिकी में घटना की संक्षिप्त सूचना दर्ज की जाती थी और विस्तृत ब्योरा लिखने की परंपरा नहीं थी। पुलिस स्थानीय मुखबिरों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर मामलों की जांच आगे बढ़ाती थी।
करीब 165 साल पुरानी यह प्राथमिकी दिल्ली पुलिस के इतिहास और उस दौर की पुलिस व्यवस्था की झलक पेश करती है। मामूली कीमत के घरेलू सामान की चोरी से जुड़ा यह दस्तावेज आज ऐतिहासिक रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित है।