
धर्मशाला। धौलाधार की पहाड़ियों में स्थित प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर करेरी झील का घटता जलस्तर चिंता का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों और यहां पहुंच रहे सैलानियों के अनुसार, झील में पानी का स्तर पहले की तुलना में काफी कम हो गया है और कुछ हिस्सों में करीब एक फीट तक पानी दिखाई दे रहा है। कम बारिश और संभावित रिसाव को इसके पीछे कारण माना जा रहा है। हालांकि, जलस्तर घटने के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी है।
करेरी झील क्षेत्र की प्रमुख प्राकृतिक धरोहरों में शामिल है। हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक और ट्रैकिंग के शौकीन यहां पहुंचते हैं। झील के आसपास का प्राकृतिक वातावरण और धौलाधार की खूबसूरत वादियां सैलानियों को आकर्षित करती हैं। ऐसे में जलस्तर में आई कमी ने पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है।
सैलानी करण तिवारी के अनुसार, वह छह साल पहले करेरी झील आए थे, तब यहां पानी का स्तर काफी अधिक था। इस बार झील में पानी कम देखकर उन्हें चिंता हुई। एक अन्य सैलानी पवित रीन ने भी जलस्तर में गिरावट की बात कही। उनके अनुसार, पानी का रिसाव नाले की ओर होने की आशंका है और इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
स्थानीय कारोबारी मनीष का कहना है कि हर साल बड़ी संख्या में सैलानी करेरी झील की ट्रैकिंग के लिए पहुंचते हैं और इसकी पहचान लगातार बढ़ रही है। ऐसे में झील के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखना जरूरी है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कम बारिश से झील में पानी की प्राकृतिक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। वहीं, संभावित रिसाव भी जलस्तर घटने का कारण हो सकता है। हालांकि, इन आशंकाओं की पुष्टि के लिए विशेषज्ञों द्वारा जांच और नियमित निगरानी आवश्यक है।
वन मंडलाधिकारी, वन मंडल धर्मशाला अमित शर्मा के अनुसार, कई बार भूकंप के कारण जमीन में दरारें बन सकती हैं, जिनसे झील में रिसाव होने की संभावना रहती है। उन्होंने कहा कि करेरी झील एक प्राकृतिक धरोहर है और इसे इसके प्राकृतिक स्वरूप में ही रखा जाएगा। इसमें किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।
करेरी झील, करेरी गांव से करीब 13 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां पहुंचने के लिए धर्मशाला-चड़ी-घरोह होते हुए घेरा मार्ग का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा शाहपुर-सल्ली की ओर से भी झील तक पहुंचने का रास्ता है, जहां से दूरी करीब 10 किलोमीटर बताई जाती है। सप्ताहांत पर यहां काफी संख्या में पर्यटक और ट्रैकिंग प्रेमी पहुंचते हैं।
झील के संरक्षण के लिए जलस्तर की नियमित निगरानी, संभावित रिसाव के कारणों की वैज्ञानिक जांच और आसपास के प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है। करेरी झील केवल पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की महत्वपूर्ण प्राकृतिक विरासत भी है।