
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में लावारिस कुत्तों, बंदरों, बिल्लियों और अन्य जानवरों के हमलों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 में जहां रोजाना करीब 40 लोग जानवरों के हमलों का शिकार होते थे, वहीं वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर लगभग 200 प्रतिदिन तक पहुंच गई है। चार साल में रोजाना सामने आने वाले मामलों में करीब पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने पीड़ितों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए एंटी रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी की है। निगम ने अपने चार अस्पतालों और 25 स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 98,500 शीशियां खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में प्रतिदिन करीब 200 लोग विभिन्न जानवरों के हमलों से प्रभावित हो रहे हैं। इनमें लगभग 100 लोग कुत्तों के काटने से घायल होते हैं, जबकि बाकी मामले बंदरों, बिल्लियों और अन्य जानवरों से जुड़े हैं। बड़ी संख्या में लोगों को उपचार की जरूरत पड़ने के कारण स्वास्थ्य केंद्रों में वैक्सीन का पर्याप्त भंडार बनाए रखना जरूरी हो गया है।
MCD के आकलन के अनुसार, उसके चार अस्पतालों और 25 स्वास्थ्य केंद्रों को सालाना औसतन करीब 60 हजार एंटी रेबीज वैक्सीन शीशियों की आवश्यकता होती है। अगले दो वर्षों की जरूरत को पूरा करने के लिए कुल 1.20 लाख शीशियां खरीदने की योजना बनाई गई है।
इसमें से 21,500 शीशियां मई 2026 में तत्काल जरूरत पूरी करने के लिए खरीदी गई थीं। अब शेष 98,500 शीशियों की खरीद को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य वैक्सीन का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना और जानवरों के हमलों के शिकार लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में जानवरों के हमलों के मामले साल-दर-साल बढ़े हैं।
2022: रोजाना करीब 40 मामले
2023: रोजाना करीब 100 मामले
2024: रोजाना करीब 150 मामले
2025: रोजाना करीब 200 मामले
2026: रोजाना लगभग 200 मामले
MCD स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा के अनुसार, जानवरों के हमलों के पीड़ितों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना जरूरी है। इसी उद्देश्य से निगम के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी रेबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए खरीद को मंजूरी दी गई है, ताकि वैक्सीन की कमी के कारण किसी पीड़ित को परेशानी न हो।
स्वास्थ्य संबंधी जरूरी सलाह: किसी जानवर के काटने या खरोंचने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से लगभग 15 मिनट तक धोएं और बिना देरी किए चिकित्सा सहायता लें। रेबीज से बचाव के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार टीकाकरण और अन्य जरूरी उपचार कराना महत्वपूर्ण है।