
लाहौल घाटी में बेमौसम बर्फबारी ने सेब बागवानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। पट्टन घाटी में सेब से लदे पेड़ों पर भारी बर्फ जमने से कई जगह टहनियां टूट गईं, जबकि तैयार सेब भी जमीन पर बिखर गए। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, बगीचों में लाखों रुपये का नुकसान होने की आशंका है। जहां बर्फबारी से पर्यटन कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, वहीं सेब बागवानों की आर्थिकी पर संकट गहरा गया है।
पट्टन घाटी में हाल ही में सेब तुड़ान का काम शुरू हुआ था। इस बार अच्छी पैदावार के चलते पेड़ों पर बड़ी मात्रा में सेब लगे हुए थे। अचानक हुई बर्फबारी के बाद पेड़ों पर जमा बर्फ के भार से टहनियां टूट गईं और कई पेड़ क्षतिग्रस्त हो गए। कड़ाके की ठंड के बीच बागवान लाठियों की मदद से पेड़ों से बर्फ हटाकर फसल बचाने में जुटे रहे, लेकिन कई बगीचों में नुकसान हो चुका था।
1,150 हेक्टेयर में फैले हैं सेब के बगीचे
लाहौल घाटी में करीब 1,150 हेक्टेयर भूमि पर सेब के बगीचे फैले हैं। यहां हर साल लगभग 3,000 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है, जिसे देश की प्रमुख मंडियों में भेजा जाता है। घाटी में रॉयल, गाला, स्पर, हेपके और रेड वन जैसी किस्मों के सेब उगाए जाते हैं। इस समय तुड़ान शुरुआती चरण में होने के कारण बड़ी मात्रा में फसल पेड़ों पर ही मौजूद थी। ऐसे में बेमौसम बर्फबारी ने बागवानों की कमाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
बेहतर दाम मिलने की उम्मीदों को झटका
बागवान प्रीतम सिंह के अनुसार, पट्टन क्षेत्र में सेब की तुड़ान अभी शुरू हुई थी और 20 किलोग्राम की पेटी के करीब 1,550 रुपये मिल रहे थे। वहीं, बागवान सुरेश ताकी ने बताया कि शिमला और कुल्लू में सेब की फसल कमजोर रहने के कारण इस बार बड़े व्यापारियों ने लाहौल का रुख किया था। स्थानीय बागवानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद थी, लेकिन सीजन के बीच हुई बर्फबारी ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है।
बागवानी विभाग ने मांगी फील्ड रिपोर्ट
बागवानी विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों से नुकसान की फील्ड रिपोर्ट मांगी है। बागवानी अधिकारी डॉ. सुशेन के मुताबिक, प्रसार अधिकारियों की विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद ही फसल और पेड़ों को हुए वास्तविक नुकसान का पता चल सकेगा। फिलहाल बागवानों को नुकसान के आकलन का इंतजार है। यदि बड़े पैमाने पर नुकसान की पुष्टि होती है, तो इसका असर इस सीजन में उनकी आमदनी पर पड़ सकता है।