
शिमला। हिमाचल प्रदेश में करीब एक लाख मृत लोगों के नाम पर सामाजिक सुरक्षा पेंशन जारी होने का मामला सामने आने के बाद सरकार ने अब इसकी बैंकिंग कड़ी की भी जांच शुरू कर दी है। मृत लाभार्थियों की पेंशन बंद करने में हुई देरी के बाद वित्त विभाग ने बैंकों की भूमिका और खातों की स्थिति की जानकारी जुटाने का फैसला लिया है। वित्त सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति से इस संबंध में रिपोर्ट तलब की है।
जांच में यह पता लगाया जाएगा कि जिन पेंशनरों की मृत्यु हो चुकी थी, उनके बैंक खाते कितने समय तक सक्रिय रहे और उनमें सामाजिक सुरक्षा पेंशन किस प्रक्रिया के तहत जमा होती रही। वित्त विभाग ने बैंकों से यह भी जानकारी मांगी है कि मृत खाताधारकों की पहचान के लिए उनके पास क्या व्यवस्था थी और मृत्यु की सूचना मिलने के बाद खाते को बंद या निष्क्रिय करने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
वित्त विभाग ने बैंकों से पूछा है कि उनके यहां कितने मृत पेंशनरों के खाते पाए गए। बैंकवार आंकड़े मिलने के बाद सरकार यह आकलन करेगी कि मामला किसी एक बैंक या क्षेत्र तक सीमित है या कई बैंकों में ऐसी स्थिति सामने आई है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि मृत लाभार्थियों के खातों में कितने समय तक पेंशन की राशि जमा होती रही।
सरकार अब केवल पेंशन सूची से मृत लाभार्थियों के नाम हटाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। सामाजिक सुरक्षा पेंशन के सरकारी रिकॉर्ड और संबंधित बैंक खातों के लेनदेन का मिलान किया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मृत्यु के बाद कितनी राशि और कितने समय तक खातों में जमा हुई।
जांच में यदि रिकॉर्ड अपडेट में देरी या तकनीकी कारण सामने आते हैं तो व्यवस्था में सुधार के कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं, यदि निर्धारित प्रक्रिया के पालन में गंभीर लापरवाही या निगरानी में चूक सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई भी हो सकती है। सरकार का फोकस अब ऐसे मामलों में सरकारी धन के अनधिकृत भुगतान को रोकने और पेंशन व्यवस्था की निगरानी मजबूत करने पर है।