
देहरादून। अंकिता भंडारी के माता-पिता को दिल्ली में हिरासत में लिए जाने के बाद उत्तराखंड में यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस बीच उत्तराखंड पुलिस ने मामले की जांच, आरोपपत्र और न्यायालय में हुई कार्रवाई का विवरण साझा किया है। एडीजी कानून-व्यवस्था डॉ. वी. मुरुगेशन के मुताबिक, पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने हत्या के मामले में 88 दिनों के भीतर जांच पूरी कर करीब 500 पन्नों का आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया था।
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2022 में ऋषिकेश के पास वनंतरा रिजॉर्ट में कार्यरत अंकिता भंडारी की हत्या का मामला सामने आने के 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर एसआईटी गठित की गई थी। इसकी अध्यक्षता डीआईजी स्तर की महिला आईपीएस अधिकारी को सौंपी गई।
एडीजी के अनुसार, एसआईटी ने जांच के दौरान डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक और भौतिक साक्ष्य जुटाए। इसके साथ ही गवाहों के बयान दर्ज किए गए और आरोपियों से पूछताछ की गई। सभी साक्ष्यों और फॉरेंसिक रिपोर्ट का विश्लेषण करने के बाद जांच पूरी कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया।
पुलिस के मुताबिक, 30 मई 2025 को कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। पुलिस का कहना है कि तीनों दोषी फिलहाल जेल में बंद हैं।
एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र से सीबीआई जांच की संस्तुति की थी। केंद्र की स्वीकृति के बाद इस मामले में सीबीआई की जांच जारी है।
अंकिता के माता-पिता के हालिया आंदोलन और उन्हें हिरासत में लिए जाने की घटना के बाद मामला फिर सुर्खियों में है। पुलिस ने अपनी ओर से की गई जांच और न्यायालयीन कार्रवाई का पक्ष रखा है, जबकि मामले से जुड़े परिवार की मांगों और आंदोलन को लेकर उठ रहे सवाल भी चर्चा में बने हुए हैं।