
देहरादून। उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता और पात्रता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश के कई गैर-मदरसा अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में निर्धारित 85 प्रतिशत अल्पसंख्यक विद्यार्थियों की शर्त पूरी होने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके बावजूद ऐसे कई संस्थान अल्पसंख्यक दर्जे का लाभ ले रहे हैं। सरकार की ओर से मान्यता के नवीनीकरण के लिए निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य किए जाने के बाद यह मामला सामने आया है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में 452 मदरसे और 91 अन्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान हैं। इनमें 27 माध्यमिक और 64 बेसिक स्तर के संस्थान शामिल हैं। अब तक 35 मदरसों और केवल दो अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों ने राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त की है। यानी कुल 543 संस्थानों में से 37 को ही प्राधिकरण से मान्यता मिली है।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता संबंधी नियमावली के अनुसार, संस्थानों में कम से कम 85 प्रतिशत विद्यार्थी अल्पसंख्यक समुदायों से होने चाहिए। मान्यता के नवीनीकरण के लिए संस्थानों को पिछले तीन वर्षों के प्रवेश रजिस्टर की प्रतियां देनी होंगी। साथ ही स्वघोषणा पत्र भी देना होगा कि इस अवधि में गैर-अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों की संख्या 15 प्रतिशत से अधिक नहीं रही है।
नियमों के तहत संस्थानों को हर तीन साल में मान्यता का नवीनीकरण कराना होगा। निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने वाले संस्थानों की पात्रता और अल्पसंख्यक दर्जे के आधार पर मिलने वाली सुविधाओं की वैधता की जांच अहम मानी जा रही है।
मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता की प्रक्रिया के लिए सरकार ने करीब आठ महीने पहले राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया था। इसके बावजूद मदरसों को छोड़कर अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान मान्यता लेने के लिए अपेक्षित संख्या में आगे नहीं आए हैं। इससे इन संस्थानों की पात्रता और निर्धारित नियमों के अनुपालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, मान्यता प्राप्त करने के लिए संस्थान में 85 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थी होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सभी संस्थानों को निर्धारित मानकों को पूरा करते हुए जल्द से जल्द प्राधिकरण से मान्यता लेनी चाहिए।
फिलहाल, इस मामले में संस्थानों की ओर से निर्धारित मानकों के अनुपालन और मान्यता की स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है। नियमों के तहत जांच के बाद ही संबंधित संस्थानों की पात्रता को लेकर स्थिति साफ हो सकेगी।