
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर शुक्रवार को प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने इस बार सिर्फ प्रदर्शन स्थल के आसपास ही नहीं, बल्कि वहां पहुंचने वाले प्रमुख रास्तों पर भी व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की। पुलिस ने बैरिकेडिंग, मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी, अतिरिक्त बल की तैनाती और निगरानी के जरिए प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को नियंत्रित किया।
शुक्रवार को जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा का व्यापक घेरा देखने को मिला। दिल्ली मेट्रो के 11 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद किए गए, जबकि लुटियंस दिल्ली की ओर आने वाले प्रमुख मार्गों पर भी पुलिस की निगरानी बढ़ाई गई। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी।
इस बार पुलिस की रणनीति में मुख्य बदलाव यह रहा कि प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही अलग-अलग स्थानों पर रोकने की कोशिश की गई। पुलिस ने जंतर-मंतर के अलावा आसपास के इलाकों और प्रमुख संपर्क मार्गों पर भी अतिरिक्त बल तैनात किया।
आईटीओ, दिल्ली गेट, आरके आश्रम, तालकटोरा, मथुरा रोड और आईएनए समेत लुटियंस दिल्ली की ओर जाने वाले मार्गों पर आवाजाही को लेकर निगरानी और ट्रैफिक नियंत्रण बढ़ाया गया। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी कनॉट प्लेस, पटेल चौक, संसद मार्ग और आसपास के रास्तों पर डायवर्जन और नियंत्रित आवाजाही की जानकारी दी थी।
प्रदर्शन से पहले दिल्ली मेट्रो ने जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, आईएनए, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद किया था। कुछ प्रमुख स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रखी गई थी।
इसका असर खास तौर पर सेंट्रल दिल्ली और जंतर-मंतर की ओर आने-जाने वाले यात्रियों पर पड़ा। पुलिस ने लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से बचकर यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी थी।
पुलिस की इस तैयारी को पिछले प्रदर्शनों के अनुभवों से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पहले हुए प्रदर्शनों के दौरान भीड़ के जुटने और आवाजाही के पैटर्न का अध्ययन किया गया। इसी आधार पर इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से तैयार की गई।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने पिछले प्रदर्शनों के ट्रेंड और खुफिया इनपुट के आधार पर नई दिल्ली क्षेत्र के लिए एडवांस प्लान तैयार किया था। जंतर-मंतर के आसपास के मेट्रो स्टेशनों पर एक अक्तूबर की रात से ही अतिरिक्त बल तैनात किया गया था।
प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित रहीं। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था के तहत ड्रोन और अन्य निगरानी माध्यमों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने भी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जंतर-मंतर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
शुक्रवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों से 500 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिनमें AAP नेता सौरभ भारद्वाज, पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा समेत विभिन्न राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों के लोग शामिल थे। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विरोध कर रहे थे।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के समूहों को अलग-अलग स्थानों पर रोककर बसों के जरिए विभिन्न थानों में भेजा। जंतर-मंतर क्षेत्र को भी कुछ समय के लिए पूरी तरह खाली कराया गया था।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की इस एडवांस प्लानिंग को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सुरक्षा तंत्र को भविष्य की चुनौतियों के लिए पहले से तैयार रखने और डेटा व खुफिया इनपुट के आधार पर कार्रवाई की रणनीति से जोड़ा गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की संभावित संख्या, उनके संभावित रूट और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को ध्यान में रखते हुए तैयारी की।
हालांकि, गृह मंत्री की सलाह और पुलिस की तैयारियों के बीच प्रत्यक्ष प्रशासनिक संबंध के बारे में उपलब्ध रिपोर्ट में पुलिस की ओर से विस्तृत स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है।
सुरक्षा व्यवस्था के चलते इस बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव का बड़ा हिस्सा जंतर-मंतर के मुख्य प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से पहले ही देखने को मिला। पुलिस ने रास्तों पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका और कई लोगों को हिरासत में लिया।
शुक्रवार की कार्रवाई के बाद जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिल्ली पुलिस की रणनीति चर्चा में रही।