
हिमाचल प्रदेश में जिला पुनर्गठन आयोग के गठन के बाद देहरा को नया जिला बनाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्र में पहले से मौजूद पुलिस जिला, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) और विभिन्न विभागों के सर्किल स्तर के कार्यालयों को देहरा के पक्ष में मजबूत आधार माना जा रहा है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि आयोग क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, आबादी और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस मांग पर विचार करेगा।
कांगड़ा प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले की आबादी करीब 15 लाख थी और इसका क्षेत्रफल 5,739 वर्ग किलोमीटर है। जिले के दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए धर्मशाला स्थित जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ता है। ऐसे में देहरा को नया जिला बनाने से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
पहले से मौजूद है प्रशासनिक ढांचा
देहरा में लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग और बिजली बोर्ड के सर्किल स्तर के कार्यालयों के साथ आरटीओ, जीएसटी सर्कल कार्यालय और पुलिस जिला पहले से स्थापित हैं। इसके अलावा डाडासीबा में एसडीएम कार्यालय खोलने की घोषणा भी की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन कार्यालयों की मौजूदगी नए जिले के गठन के लिए आधार तैयार करती है। हालांकि, जिला बनने की स्थिति में अतिरिक्त कार्यालयों, अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संसाधनों की जरूरत का आकलन भी करना होगा।
देहरा, ज्वालामुखी और जसवां-परागपुर को शामिल करने की चर्चा
संभावित देहरा जिले में देहरा, ज्वालामुखी और जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किए जाने की चर्चा है। जवाली विधानसभा क्षेत्र को भी संभावित दायरे में शामिल करने का विकल्प विचारणीय बताया जा रहा है। हालांकि, इन क्षेत्रों की सीमाओं को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। आयोग की सिफारिशों और प्रदेश सरकार के फैसले के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
धर्मशाला की 60 से 100 किलोमीटर दूरी से मिलेगी राहत
देहरा, ज्वालामुखी और जसवां-परागपुर के कई हिस्सों से धर्मशाला स्थित जिला मुख्यालय की दूरी करीब 60 से 100 किलोमीटर तक बताई जाती है। ऐसे में सरकारी कामकाज के लिए लोगों को लंबी यात्रा करनी पड़ती है। देहरा जिला बनने से प्रशासनिक सेवाएं नजदीक उपलब्ध होने की उम्मीद है। इससे लोगों के समय और खर्च की बचत के साथ क्षेत्र में विकास कार्यों और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
बड़ी आबादी और विस्तृत क्षेत्र का दिया जा रहा तर्क
देहरा, ज्वालामुखी और जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्रों में देहरा, हरिपुर, जसवां कोटला, डाडासीबा, रक्कड़, परागपुर और खुंडियां सहित कई क्षेत्र आते हैं। इसके अलावा मझीन और लगड़ू उपतहसीलें भी क्षेत्र के प्रशासनिक दायरे का हिस्सा हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देहरा विधानसभा क्षेत्र में करीब 85,263, ज्वालामुखी में 80,141 और जसवां-परागपुर में 80,533 मतदाता हैं। क्षेत्र का विस्तृत भौगोलिक दायरा और प्रशासनिक जरूरतें जिला बनाने की मांग के प्रमुख आधार माने जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने उठाई जिला बनाने की मांग
समाजसेवी पवन बजरंगी का कहना है कि देहरा को जिला बनाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। जिला बनने से लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और समय व पैसे की बचत होगी।
व्यवसायी सुधीर शर्मा के अनुसार, देहरा, ज्वालामुखी और जसवां-परागपुर क्षेत्रों को एक जिला व्यवस्था में शामिल करने से विकास कार्यों में तेजी आ सकती है। सरकारी कार्यालयों के विस्तार से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की भी उम्मीद है।
वहीं, देहरा निवासी नवीन वैद ने क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और लोगों की जरूरतों को देखते हुए इस मांग पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। बढ़ल निवासी संपत कुमार का कहना है कि जिला पुनर्गठन आयोग के गठन के बाद उम्मीद बढ़ी है कि सरकार जनसंख्या और प्रशासनिक सुविधाओं को ध्यान में रखकर सकारात्मक निर्णय लेगी।
अब आयोग की सिफारिशों पर टिकी निगाहें
देहरा को जिला बनाने की मांग के पक्ष में मौजूदा प्रशासनिक ढांचे, धर्मशाला से दूरी और स्थानीय लोगों की सुविधा जैसे तर्क दिए जा रहे हैं। फिलहाल देहरा को नया जिला बनाने या उसकी सीमाएं निर्धारित करने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें जिला पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों और प्रदेश सरकार के निर्णय पर टिकी हैं।