
देहरा/कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के देहरा परिवार न्यायालय ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में पति की तलाक याचिका स्वीकार करते हुए विवाह विच्छेद की डिक्री जारी की है। अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद क्रूरता और परित्याग को तलाक का आधार माना। मामले की सुनवाई अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश सपना पांडेय की अदालत में हुई। याचिका ज्वालामुखी तहसील के एक व्यक्ति ने दायर की थी।
पति ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि शादी के करीब चार साल बाद वर्ष 2014 में पत्नी के व्यवहार में बदलाव आने लगा था। उसके अनुसार, छोटी-छोटी बातों पर विवाद होता था और पत्नी उसे तथा उसके माता-पिता को अपमानित करती थी। पति ने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी घरेलू जिम्मेदारियां निभाने से इनकार करती थी और महंगे कपड़े या शृंगार का सामान न दिलाने पर अपशब्द कहती थी।
याचिका के मुताबिक, मई 2017 में पत्नी ने उसके साथ मारपीट भी की थी। पति ने इन घटनाओं को वैवाहिक जीवन में क्रूरता का आधार बताया।
पति ने अदालत को बताया कि जुलाई 2018 में उसकी गैरमौजूदगी में पत्नी घर छोड़कर मायके चली गई। उसने पत्नी को वापस लाने के लिए कई बार प्रयास किए, लेकिन वह लौटकर नहीं आई। पति का आरोप था कि पत्नी ने फोन पर कई बार तलाक की मांग की और रिश्तेदारों के बीच उसके बारे में नकारात्मक बातें कहीं। उसने बच्चों से मिलने में परेशानी होने की बात भी याचिका में कही।
मामले की सुनवाई के दौरान पत्नी अदालत में उपस्थित नहीं हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अक्टूबर 2025 में अदालत ने कार्यवाही एकतरफा जारी रखने का आदेश दिया। पति की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों का पत्नी की तरफ से प्रतिवाद नहीं किया गया।
अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों का मूल्यांकन किया। न्यायालय ने क्रूरता और परित्याग से जुड़े आधारों को स्वीकार करते हुए पति की तलाक याचिका मंजूर कर ली और विवाह विच्छेद की डिक्री जारी कर दी।
इस फैसले के साथ दोनों के वैवाहिक संबंध को कानूनी रूप से समाप्त करने का आदेश दिया गया।