
देहरादून, उत्तराखंड। देहरादून चिड़ियाघर में अब पर्यटकों को सफेद बाघ का दीदार करने का मौका मिलेगा। ग्वालियर जूलॉजिकल पार्क से बाघ विनिमय कार्यक्रम के तहत सफेद बाघ ‘तेजस’ को देहरादून लाया गया है। सफेद रंग, गहरी धारियों और नीली आंखों वाला तेजस उत्तराखंड का पहला सफेद बाघ बताया जा रहा है।
तेजस ने सड़क मार्ग से करीब 556 किलोमीटर की दूरी 12 से 14 घंटे में तय की। उसे विशेष रेस्क्यू वाहन के जरिए देहरादून लाया गया। उसके साथ 13 सदस्यीय टीम रही, जिसमें पशु चिकित्सक और वन विभाग के अधिकारी भी शामिल थे।
देहरादून पहुंचने के बाद तेजस को फिलहाल नए वातावरण में ढलने का समय दिया जा रहा है। उसके स्वास्थ्य और व्यवहार पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
नए वातावरण में स्वास्थ्य और व्यवहार की निगरानी के लिए तेजस को करीब 20 दिनों तक क्वारंटीन में रखा जाएगा। इस दौरान केवल केयरटेकर और पशु चिकित्सक ही उसकी देखभाल करेंगे।
अधिकारियों के अनुसार, क्वारंटीन अवधि पूरी होने और स्वास्थ्य की स्थिति सामान्य रहने के बाद पर्यटक करीब एक माह बाद सफेद बाघ तेजस को देख सकेंगे।
बाघ विनिमय कार्यक्रम के तहत देहरादून चिड़ियाघर से करीब पांच वर्षीय रॉयल बंगाल टाइगर ‘भोला’ को ग्वालियर भेजा गया है। इस आदान-प्रदान का उद्देश्य चिड़ियाघरों में वन्यजीवों की विविधता और प्रबंधन को बेहतर करना है।
सफेद बाघ कोई अलग प्रजाति या नस्ल नहीं है। उसका सफेद रंग एक दुर्लभ आनुवंशिक विशेषता के कारण होता है। अल्बिनो जानवरों के विपरीत सफेद बाघ के शरीर पर गहरी धारियां बनी रहती हैं। यह बंगाल टाइगर में पाई जाने वाली प्राकृतिक रंग विविधता है।