
धर्मशाला। साइबर ठगों ने फर्जी दानदाता बनकर धर्मशाला के समीप स्थित एक बौद्ध धार्मिक संस्थान से 6.58 लाख रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया। शातिरों ने संस्थान के पुराने दानदाता के नाम से मिलती-जुलती ई-मेल भेजकर दो परिचितों के आपातकालीन इलाज के लिए भारत आने का हवाला दिया और आर्थिक मदद मांगी। इसके बाद संस्थान के छह कर्मचारियों से नौ बार में अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवा ली।
पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, 5 अक्तूबर को संस्थान को एक ऐसी ई-मेल मिली, जिसका नाम पुराने दानदाता के नाम से मिलता-जुलता था। ई-मेल में दावा किया गया कि दानदाता के दो परिचित इलाज के लिए भारत आ रहे हैं और वह सीधे भारतीय बैंक खाते में पैसे नहीं भेज पा रहे हैं। कथित तौर पर रकम जल्द लौटाने का भरोसा देकर संस्थान से आर्थिक सहायता मांगी गई।
शिकायत के मुताबिक, जब संस्थान की ओर से कार्यालय के खाते से भुगतान करने में असमर्थता जताई गई तो ई-मेल भेजने वाले व्यक्ति ने निदेशक का मोबाइल नंबर लिया और व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क किया। इसके बाद निदेशक के कहने पर संस्थान के छह कर्मचारियों ने 6 से 9 अक्तूबर के बीच बैंक ऑफ महाराष्ट्र और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के दो खातों में कुल 6.58 लाख रुपये नौ बार में ट्रांसफर कर दिए।
बाद में संस्थान प्रबंधन ने वास्तविक दानदाता से संपर्क किया तो पता चला कि उन्होंने न तो ऐसी कोई ई-मेल भेजी थी और न ही आर्थिक मदद मांगी थी। इसके बाद संस्थान को धोखाधड़ी का पता चला और पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई।
एएसपी साइबर क्राइम पुलिस थाना धर्मशाला कुलदीप कुमार ने बताया कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। मामले को आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच के लिए स्थानीय थाने में स्थानांतरित कर दिया गया है।
साइबर सुरक्षा सुझाव: किसी भी ई-मेल या व्हाट्सएप संदेश के आधार पर पैसे ट्रांसफर करने से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। मिलते-जुलते ई-मेल पते और जल्द पैसे लौटाने के भरोसे के जरिए की जाने वाली ठगी से सतर्क रहें।