
जोशीमठ/चमोली। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से फिल्म जगत में शोक की लहर है। 75 वर्षीय अभिनेता का गुरुवार सुबह गोवा में गंभीर कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हो गया। नाना पाटेकर का उत्तराखंड से भी खास जुड़ाव रहा है। मराठी फिल्म की शूटिंग के लिए चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र में पहुंचे नाना यहां की प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय जीवन से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने भविष्य में यहां जमीन खरीदकर रहने की इच्छा जताई थी।
नाना पाटेकर मराठी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में चमोली की नीती घाटी पहुंचे थे। फिल्म यूनिट ने लाता, मलारी, नीती गांव और तपोवन क्षेत्र में करीब नौ दिनों तक शूटिंग की। इस दौरान नाना पाटेकर ने स्थानीय लोगों से मुलाकात की और यहां के रहन-सहन, वेशभूषा और मौसम के बारे में जानकारी ली। स्थानीय लोगों के अनुसार, अभिनेता को पहाड़ की वादियां बेहद पसंद आई थीं।
शूटिंग के दौरान जोशीमठ की तत्कालीन एसडीएम कुमकुम जोशी ने भी नाना पाटेकर से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्हें स्थानीय सेब और अखरोट भेंट किए गए। नाना ने स्थानीय लोगों के साथ बातचीत में क्षेत्र की प्राकृतिक खूबसूरती की सराहना की और यहां रहने की इच्छा व्यक्त की थी।
चमोली प्रवास के दौरान नाना पाटेकर ने सेना ब्रिगेड में अधिकारियों और जवानों से भी मुलाकात की। बताया जाता है कि उन्होंने मराठी और तेलुगु बोलने वाले जवानों से उनकी भाषा में बातचीत कर माहौल को खुशनुमा बना दिया था।
स्थानीय लोगों के मुताबिक नाना पाटेकर का व्यवहार बेहद सहज था। उन्होंने करीब पंद्रह मिनट तक स्थानीय लोगों के साथ बातचीत की और आसपास के तीर्थस्थलों तथा पर्यटन स्थलों के बारे में भी जानकारी ली। स्थानीय लोगों ने बताया कि अभिनेता ने यहां मकान बनाने की इच्छा भी जाहिर की थी।
चमोली की नीती घाटी में करीब नौ दिनों तक शूटिंग के बाद नाना पाटेकर हेलिकॉप्टर से रुद्रप्रयाग जिले के गुप्तकाशी पहुंचे थे। इस तरह उत्तराखंड का उनका यह प्रवास सिर्फ फिल्म शूटिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पहाड़ और स्थानीय लोगों से जुड़ी उनकी यादों का हिस्सा भी बन गया।
नाना पाटेकर के निधन के बाद चमोली में उनके प्रवास से जुड़ी ये यादें एक बार फिर सामने आ रही हैं। जोशीमठ, लाता, मलारी और नीती घाटी के स्थानीय लोगों के लिए उनका यहां आना और उत्तराखंड में बसने की इच्छा जताना अब उनकी यादों का हिस्सा बन गया है।