
हिमाचल प्रदेश में जिला पुनर्गठन आयोग के गठन के बाद पालमपुर को नया जिला बनाने की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। चार सदस्यीय आयोग के गठन से क्षेत्र के लोगों को उम्मीद जगी है कि इस बार उनकी मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। पालमपुर को जिला बनाने से बैजनाथ, सुलह, पालमपुर और जयसिंहपुर विधानसभा क्षेत्रों के लोगों को प्रशासनिक सुविधाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।
पालमपुर को जिला बनाने की कवायद पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल में शुरू हुई थी। उस दौरान यहां अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यानी एएसपी का कार्यालय भी खोला गया था, लेकिन राजनीतिक कारणों से जिला बनाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। बाद में एएसपी कार्यालय भी बंद कर दिया गया। इसके बाद पालमपुर जिला बनाओ संघर्ष समिति ने इस मांग को लेकर लगातार आवाज उठाई, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका।
धर्मशाला की दूरी बनेगी जिला बनाने का प्रमुख आधार
पालमपुर में कृषि विश्वविद्यालय, सैनिक स्कूल, बड़े शिक्षण संस्थान, अस्पताल और एसडीएम कार्यालय जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। इसके बावजूद छोटा भंगाल, चढियार और आलमपुर सहित कई दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को जिला मुख्यालय धर्मशाला पहुंचने के लिए करीब 80 से 100 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ता है। ऐसे में पालमपुर को जिला बनाने से लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करने से राहत मिल सकती है।
विधायक आशीष बुटेल के लिए भी अहम मुद्दा
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल ने भी क्षेत्र को जिला बनाने की बात कही थी। अब जिला पुनर्गठन आयोग के गठन के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। यदि सरकार पालमपुर को जिला बनाने का फैसला करती है, तो इसे विधायक आशीष बुटेल के लिए भी बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा सकता है। हालांकि, अभी तक जिला बनाने को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
संघर्ष समिति और महापौर ने जताई उम्मीद
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं जिला बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष जगमेल कटोच ने पालमपुर को जल्द जिला बनाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि पहले भी इस दिशा में पहल हुई थी, लेकिन मांग पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने जनता की सुविधा को देखते हुए पालमपुर को जिला बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
वहीं, नगर निगम पालमपुर की महापौर राधा सूद ने कहा कि जिला पुनर्गठन आयोग के गठन से इस मांग को लेकर उम्मीद बढ़ी है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार इस विषय पर सकारात्मक निर्णय ले सकती है।
आयोग के सामने रखने होंगे ठोस तथ्य
कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के पूर्व कुलपति प्रो. अशोक सरियाल के अनुसार, पालमपुर को जिला बनाने के लिए राजनीतिक नेताओं के साथ-साथ विभिन्न संस्थाओं, संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों को भी तथ्य आधारित प्रयास करने चाहिए। उन्होंने आयोग के सामने क्षेत्र की जरूरतों और प्रशासनिक सुविधाओं से जुड़े ठोस तथ्य रखने की अहमियत पर जोर दिया।
फिलहाल पालमपुर को नया जिला बनाने की मांग पर लोगों की निगाहें जिला पुनर्गठन आयोग और प्रदेश सरकार के फैसले पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि वर्षों से चली आ रही यह मांग कब तक पूरी होती है।