
शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला ने रोजगार और श्रम बल में भागीदारी के मामले में देश की अन्य राज्य राजधानियों को पीछे छोड़ दिया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानी एनएसओ की ओर से सितंबर 2026 में जारी पहली जिला स्तरीय श्रम बाजार रिपोर्ट के अनुसार, शिमला में 15 वर्ष और इससे अधिक आयु की आबादी की श्रम बल सहभागिता दर 70 प्रतिशत दर्ज की गई है। वहीं, श्रमिक जनसंख्या अनुपात 65.1 प्रतिशत रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, श्रम बल सहभागिता दर में केरलम की राजधानी तिरुवनंतपुरम 64.4 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर 61.5 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है। श्रमिक जनसंख्या अनुपात के मामले में भी शिमला 65.1 प्रतिशत के साथ आगे रहा। तिरुवनंतपुरम में यह अनुपात 63.2 प्रतिशत और रायपुर में 59.4 प्रतिशत दर्ज किया गया।
श्रम बल सहभागिता दर यानी एलएफपीआर से पता चलता है कि 15 वर्ष या उससे अधिक आयु की आबादी में कितने लोग काम कर रहे हैं या काम की तलाश में श्रम बल का हिस्सा हैं। इसमें रोजगार तलाश रहे और काम करने के लिए उपलब्ध लोग भी शामिल होते हैं। रिपोर्ट में 15 से 29 वर्ष के उन युवाओं का भी आकलन किया गया है, जो न रोजगार में हैं, न शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और न ही किसी प्रशिक्षण से जुड़े हैं। इस श्रेणी को एनईईटी कहा जाता है। शिमला में इस वर्ग की दर 20.5 प्रतिशत दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के राष्ट्रीय निष्कर्षों के अनुसार, देश के 98.8 प्रतिशत जिलों में श्रम बल सहभागिता दर 40 से 70 प्रतिशत के बीच रही। वहीं, 98.3 प्रतिशत जिलों में श्रमिक जनसंख्या अनुपात इसी दायरे में दर्ज किया गया। बेरोजगारी दर के मामले में करीब 77.8 प्रतिशत जिलों में यह आंकड़ा 0.5 से 5.5 प्रतिशत के बीच रहा।
देश के 100 सर्वाधिक आबादी वाले जिलों में गुजरात के सूरत जिले में श्रम बल सहभागिता दर 68.6 प्रतिशत और श्रमिक जनसंख्या अनुपात 67.8 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके विपरीत, बिहार के दरभंगा जिले में इन दोनों संकेतकों का स्तर सबसे कम रहा।
एनएसओ की इस रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े शिमला की श्रम बाजार स्थिति को दर्शाते हैं। हालांकि, श्रम बल सहभागिता दर और श्रमिक जनसंख्या अनुपात को सीधे बेरोजगारी दर नहीं माना जा सकता, क्योंकि ये अलग-अलग आर्थिक संकेतक हैं।