
शिमला, हिमाचल प्रदेश। राजधानी शिमला में ढली-कैथलीघाट फोरलेन के तहत भट्ठाकुफर से चलौंठी तक बन रही ट्विन टनल को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। टनल निर्माण के दौरान मकानों में दरारें आने और स्थानीय लोगों के विरोध के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एलाइनमेंट में आने वाले करीब 500 मकानों का बिल्डिंग कंडीशन सर्वे करवाने का फैसला लिया है। सर्वे के दौरान मकानों की मौजूदा स्थिति का आकलन करने के लिए फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी की जाएगी।
शिमला के संजौली स्थित शांति विहार और भट्ठाकुफर क्षेत्र में टनल निर्माण को लेकर स्थानीय निवासी चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान उनके मकानों में दरारें आई हैं, जिससे उनकी संपत्ति की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। शांति विहार में मकानों में दरारें आने के बाद ट्विन टनल का निर्माण कार्य रोक दिया गया है।
स्थानीय भवन मालिकों की मांग है कि टनल का निर्माण मौजूदा एलाइनमेंट के अनुसार न किया जाए और फोरलेन को पुराने सर्वे के आधार पर बनाया जाए। प्रभावित लोगों ने निर्माण कार्य बंद करने और मकानों को हुए नुकसान के लिए उचित मुआवजा देने की मांग भी उठाई है।
NHAI के मुताबिक भट्ठाकुफर से चलौंठी तक टनल के एलाइनमेंट में आने वाले करीब 500 मकानों का बिल्डिंग कंडीशन सर्वे किया जाएगा। इसके जरिए प्रत्येक भवन की वर्तमान स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। सर्वे में जिन मकानों की हालत खराब पाई जाएगी, उनकी मरम्मत और मजबूती के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
परवाणू-शिमला फोरलेन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आनंद दहिया के अनुसार, निर्माण कार्य दोबारा शुरू करने से पहले भवनों की स्थिति का आकलन किया जाएगा। जिन मकानों में दरारें आई हैं, उनके रेस्टोरेशन और कमजोर भवनों को मजबूत करने पर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भवन मालिकों को विश्वास में लेने और उनकी संतुष्टि के बाद ही आगे की प्रक्रिया बढ़ाई जाएगी।
भट्ठाकुफर से चलौंठी तक करीब 2.712 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, इसमें करीब 700 मीटर तक काम पूरा हो चुका है। टनल के ऊपर भट्ठाकुफर, शांति विहार और चलौंठी क्षेत्र में बड़ी संख्या में मकान बने हुए हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों को आशंका है कि निर्माण कार्य से उनकी संपत्ति को और नुकसान पहुंच सकता है।
शांति विहार में मकानों में दरारें आने के कारणों की जांच के लिए IIT की टीम भी जांच कर रही है।
टनल निर्माण का विरोध कर रहे भवन मालिकों से पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने मुलाकात की। इस दौरान लोगों ने अपनी शिकायतें रखते हुए निर्माण कार्य बंद करने, पुराने सर्वे के आधार पर फोरलेन बनाने और प्रभावित भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। मंत्री ने समिति के प्रतिनिधियों की मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के साथ बैठक करवाने का आश्वासन दिया।
स्थानीय भवन मालिकों और संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का आरोप है कि निर्माण से पहले सुरक्षा और निगरानी के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। उनका कहना है कि कई मकानों में दरारें आ चुकी हैं और आसपास के अन्य भवनों को भी खतरा होने की आशंका है। प्रभावित लोगों ने उचित मुआवजा, मकानों के संरक्षण और पुराने एलाइनमेंट के अनुसार फोरलेन निर्माण की मांग उठाई है।
अब सबकी नजर NHAI के सर्वे, IIT की जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। सर्वे के निष्कर्ष और जांच रिपोर्ट से ही मकानों को हुए नुकसान के कारणों और आगे उठाए जाने वाले कदमों को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।