
शिमला। राजधानी शिमला में मौसम के बदलते मिजाज का असर अब लोगों की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है। मौसम में बदलाव के बीच वातावरण में पोलन यानी परागकण बढ़ने से चर्म रोग और एलर्जी से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही खांसी, जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। मंगलवार को दीनदयाल उपाध्याय जोनल अस्पताल (डीडीयू) की मेडिसिन ओपीडी के बाहर मरीजों की भीड़ देखी गई।
डीडीयू की मेडिसिन ओपीडी में मंगलवार को करीब 30 वायरल पीड़ित मरीजों की जांच की गई। बीमारी का कारण पता लगाने के लिए चिकित्सकों ने आवश्यक टेस्ट भी करवाए। वहीं, चर्म रोग विशेषज्ञ ओपीडी में करीब 15 मरीज रैशेज और एलर्जी की शिकायत लेकर पहुंचे। मरीजों ने बाजू, मुंह और शरीर के अन्य हिस्सों में एलर्जी की समस्या बताई।
चर्म रोग विशेषज्ञों के अनुसार मौसम में बदलाव और वातावरण में मौजूद पोलन कुछ लोगों में एलर्जी की समस्या को बढ़ा सकता है। ऐसे में लोगों को शरीर को ढककर रखने और परागकणों के सीधे संपर्क से बचने की सलाह दी गई है। खासकर जिन लोगों को पहले से एलर्जी की शिकायत रहती है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
मौसम में बदलाव के कारण सुबह और शाम तापमान में गिरावट भी हो रही है। इसके चलते खांसी, जुकाम और बुखार की शिकायत लेकर मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। डीडीयू के साथ आईजीएमसी की ओपीडी में भी वायरल और एलर्जी से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं।
डीडीयू के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. योगराज ने लोगों को स्वास्थ्य का ध्यान रखने और बाहर निकलते समय शरीर को ढककर रखने की सलाह दी है। वहीं मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. सोनिया के अनुसार सुबह-शाम मौसम में बदलाव और पोलन के कारण वायरल से जुड़े मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार पोलन से बचने के लिए तेज हवा और सुबह के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। बाहर से घर लौटने के बाद नहाने और कपड़े बदलने से शरीर और बालों पर चिपके परागकण हटाए जा सकते हैं। बाहर जाते समय मास्क का इस्तेमाल करने और घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की भी सलाह दी गई है।
यदि एलर्जी के लक्षण गंभीर हों, त्वचा पर ज्यादा रैशेज दिखाई दें या लगातार बुखार और सांस लेने में परेशानी हो, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।