
नई दिल्ली: दिल्ली में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग ने लाखों मतदाताओं को बड़ी राहत दी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नाम न होने के आधार पर किसी भी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा।
आयोग ने साफ किया है कि किसी मतदाता का नाम केवल दो ही परिस्थितियों में मसौदा मतदाता सूची से हटाया जा सकता है—यदि वह 17 अगस्त तक अपना एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं करता या फिर जांच में मतदान के लिए पात्र नहीं पाया जाता।
पिछले कुछ दिनों से यह आशंका जताई जा रही थी कि वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नाम न होने पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। इसी बीच चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्टीकरण जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी।
आयोग के अनुसार, यदि किसी मतदाता का नाम वर्ष 2002 की विशेष गहन पुनरीक्षण सूची में नहीं मिलता है, तो वह अपने माता-पिता या पैतृक/मातृ पक्ष के दादा-दादी का विवरण उपलब्ध करा सकता है। यदि उनके नाम भी सूची में नहीं मिलते हैं, तब भी संबंधित मतदाता उपलब्ध जानकारी के साथ एन्यूमरेशन फॉर्म बूथ लेवल अधिकारी (BLO) को जमा कर सकता है।
ऐसे मामलों में मतदाता का विवरण डिजिटाइज किया जाएगा और उसका नाम 24 अगस्त को प्रकाशित होने वाली मसौदा मतदाता सूची में शामिल रहेगा। इसके बाद 24 अगस्त से 23 सितंबर के बीच संबंधित मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे। नोटिस मिलने पर उन्हें निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के समक्ष आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। सत्यापन पूरा होने के बाद उनका नाम 27 अक्टूबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची में बरकरार रखा जाएगा।
चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि 2002 के बाद दूसरे राज्यों से दिल्ली आए मतदाताओं को अपने मूल राज्य में वर्ष 2002, 2003 या 2005 में हुए अंतिम विशेष गहन पुनरीक्षण का विवरण उपलब्ध कराना होगा।
इसके अलावा, वर्ष 2002 की विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी गई है। मतदाता Search by Details, EPIC नंबर या पोलिंग स्टेशन के माध्यम से अपना और अपने परिजनों का नाम ऑनलाइन जांच सकते हैं।