
नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर पिछले 14 दिनों से चल रहा आंदोलन प्रशासन के फैसले के बाद अहम मोड़ पर पहुंच गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने करीब दो दशक बाद छात्रसंघ चुनाव कराने का ऐलान किया है। इसके साथ ही प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी निलंबन और कारण बताओ नोटिस तत्काल वापस लेने का निर्णय भी लिया गया है।
रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से 26 अक्टूबर को जारी आदेश के मुताबिक, छात्रसंघ चुनाव विश्वविद्यालय के छात्रसंघ संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन बाद आयोजित किए जाएंगे। हालांकि, मतदान की निश्चित तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंदोलन के दौरान छात्रों को जारी किए गए निलंबन और कारण बताओ नोटिस निरस्त करने का फैसला किया है। इसके अलावा, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मियों की ओर से की गई कार्रवाई की जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी।
आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में से रिदा नौशाद, जासिम और रेहान हैदर ने हड़ताल समाप्त कर दी है। वहीं, एबिन और रेहान पंवार अब भी भूख हड़ताल पर हैं। दोनों छात्र प्रशासन के साथ हुए समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं, इसके बावजूद उन्होंने हड़ताल जारी रखी है।
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर तीन सांसदों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें कांग्रेस के लोकसभा सांसद इमरान मसूद, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी शामिल हैं।
जामिया नगर थाने में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि तीनों सांसद बिना अनुमति परिसर में दाखिल हुए और छात्रों को भड़काकर माहौल खराब करने का प्रयास किया। ये आरोप शिकायत के आधार पर दर्ज किए गए हैं।
प्रदर्शनकारी छात्र छात्रसंघ की बहाली, चुनाव की तारीख घोषित करने, अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और चीफ प्रॉक्टर व सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। अब चुनाव कराने और छात्रों पर कार्रवाई वापस लेने के प्रशासनिक फैसले के बाद आंदोलन की आगे की दिशा पर नजर बनी हुई है।