
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सोमवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में मामूली सुधार दर्ज किया गया, लेकिन कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर अब भी चिंताजनक बना हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, सुबह 7:05 बजे दिल्ली का औसत AQI 164 दर्ज किया गया, जबकि रविवार को यह 167 था। हालांकि, विवेक विहार, आरके पुरम और नरेला में हवा खराब श्रेणी में रही।
आंकड़ों के मुताबिक, विवेक विहार में AQI 235, आरके पुरम में 223 और नरेला में 217 दर्ज किया गया। इन तीनों क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर दिल्ली के औसत से अधिक रहा। CPCB के मानकों के अनुसार, 101 से 200 के बीच AQI मध्यम और 201 से 300 के बीच खराब श्रेणी में आता है।
दिल्ली के 60 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से 55 के आंकड़े उपलब्ध थे। इनमें 30 केंद्रों पर PM 2.5 सबसे प्रमुख प्रदूषक रहा। PM 2.5 के सूक्ष्म कण सांस के साथ फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़कों की धूल, निर्माण कार्य, औद्योगिक उत्सर्जन और ईंधन जलाना प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। हवा की गति कम होने पर प्रदूषक वातावरण में जमा रह सकते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है।
मध्यम श्रेणी की हवा भी अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को परेशानी दे सकती है। वहीं, खराब श्रेणी में लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में संवेदनशील लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए 21 अक्टूबर से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू है। इसके तहत होटल, रेस्तरां और खुले में भोजन परोसने वाली जगहों पर तंदूर में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा डीजल जनरेटर के उपयोग पर भी निर्धारित नियमों के तहत प्रतिबंध लगाए गए हैं।
राजधानी के औसत AQI में मामूली गिरावट के बावजूद तीन प्रमुख इलाकों में प्रदूषण का स्तर खराब श्रेणी में बना हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रदूषण नियंत्रण के उपाय अहम रहेंगे।