
मंडी। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मंडी के सेरी मंच पर आयोजित प्रदर्शनी में खरगोश की ऊन से बनी एक लाख रुपये की शॉल और 30 हजार रुपये का मफलर लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन बेशकीमती हस्तनिर्मित उत्पादों को राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त कारीगर नरेश कुमार प्रदर्शनी में लेकर पहुंचे हैं।
प्रदर्शनी में करीब आठ से दस हथकरघा और स्थानीय उत्पादक-विक्रेता शामिल हुए हैं। नरेश कुमार के अनुसार, उनकी एक लाख रुपये की शॉल को हाथ से तैयार करने में करीब छह से सात महीने का समय लगता है। शॉल में महाभारत काल के चक्रव्यूह की आकृति, रानी के नौलखे हार, टका आकृति और मोर पंचा जैसे पारंपरिक डिजाइन उकेरे गए हैं।
नरेश कुमार ने बताया कि इस तरह की शॉल की किन्नौर में काफी मांग रहती है और वह दिल्ली में भी अपने उत्पाद भेज चुके हैं। मंडी की प्रदर्शनी में वह इस शॉल का केवल एक पीस लेकर आए हैं। इसी कारीगरी से तैयार किया गया उनका 30 हजार रुपये का मफलर भी लोगों का ध्यान खींच रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में अब तक उनकी 20 हजार रुपये की एक शॉल, 18 हजार रुपये का स्टॉल और कुछ अन्य पट्टियां बिक चुकी हैं। नरेश कुमार अर्की में ‘तमन्ना ट्रेनिंग एंड सेल सेंटर’ नाम से एक छोटा उद्योग भी चलाते हैं।
नरेश कुमार के मुताबिक, करीब पांच-छह साल पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंडी आए थे, उस दौरान उन्हें पहनाई गई शॉल भी इसी शैली की थी और उसे उन्होंने ही तैयार किया था। उस समय उस शॉल की कीमत करीब 35 हजार रुपये थी, जो अब बढ़कर करीब 60 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
प्रदर्शनी में नरेश कुमार शॉल और टोपियों के किनारों पर लगने वाली पारंपरिक पट्टियां भी मौके पर ही तैयार कर रहे हैं। इसके लिए वह अपने साथ एक छोटी खड्डी लेकर आए हैं। खड्डी पर पट्टियां बनाते देखना भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। नरेश कुमार के अनुसार, उनकी कई पट्टियां भी प्रदर्शनी में बिक चुकी हैं।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर लगी यह प्रदर्शनी 11 अगस्त तक सेरी मंच पर आयोजित की जा रही है, जहां स्थानीय हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।