
22 साल तक सुरक्षा सेवाओं में दी जिम्मेदारी, 2007 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर राजनीति में आए; लगातार चार चुनाव जीतकर रामपुर का किया प्रतिनिधित्व
शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में रामपुर के दिवंगत विधायक नंद लाल का जीवन सफर कई मायनों में खास रहा। सुरक्षा बल में कमांडो के रूप में सेवाएं देने से लेकर लगातार चार बार विधायक बनने तक उन्होंने एक अलग पहचान बनाई। उनके जीवन का एक अहम पहलू यह भी था कि वह कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की सुरक्षा टीम में कमांडो के रूप में तैनात रहे थे।
नंद लाल का जन्म 16 अप्रैल 1954 को शिमला जिले के रामपुर बुशहर क्षेत्र के देवठी गांव में हुआ था। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। इसके बाद वह भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में शामिल हुए और कमांडो दल में सेवाएं दीं।
वर्ष 1985 में उन्हें विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) में शामिल किया गया। वह 1985 से 1997 तक एसपीजी में रहे। इस दौरान उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाईं। वह सोनिया गांधी की सुरक्षा टीम में भी कमांडो के रूप में तैनात रहे। देश के कई महत्वपूर्ण आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था में भी उन्होंने योगदान दिया।
राजीव गांधी और चंद्रशेखर से मिले प्रशंसा पत्र
नंद लाल की सेवाओं को तत्कालीन प्रधानमंत्रियों राजीव गांधी और चंद्रशेखर ने सराहा था। उन्हें दोनों नेताओं की ओर से उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रशंसा पत्र मिले थे। इसके अलावा उन्होंने जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में आईटीबीपी बटालियन की कमान भी संभाली। सुरक्षा क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था।
2007 में राजनीति में रखा कदम
करीब 22 साल तक सुरक्षा सेवाओं में जिम्मेदारी निभाने के बाद नंद लाल ने वर्ष 2007 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें रामपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा। उन्होंने अपने पहले ही चुनाव में जीत दर्ज की और इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।
लगातार चार बार बने विधायक
नंद लाल ने 2007, 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में लगातार जीत हासिल की। इस तरह उन्होंने चार बार रामपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2013 में उन्हें मुख्य संसदीय सचिव बनाया गया। उन्होंने विधानसभा की विभिन्न समितियों में भी जिम्मेदारियां निभाईं।
मार्च 2024 में प्रदेश सरकार ने उन्हें सातवें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था। इस पद के साथ उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी मिला था।
3 नवंबर 2026 को 72 वर्ष की आयु में उनके निधन के साथ हिमाचल प्रदेश की राजनीति ने एक ऐसे नेता को खो दिया, जिनका सफर सुरक्षा बल की वर्दी से शुरू होकर विधानसभा तक पहुंचा।