
हिमाचल प्रदेश: प्रदेश में किसानों को खाद उपलब्ध करवाने वाली व्यवस्था पर हिमफेड की करोड़ों रुपये की देनदारी भारी पड़ती नजर आ रही है। हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी विपणन एवं उपभोक्ता संघ लिमिटेड (हिमफेड) पर करीब 5.50 करोड़ रुपये की देनदारी के चलते इफको ने खाद की आपूर्ति रोक दी है। इससे आने वाले दिनों में किसानों के सामने खाद की किल्लत की स्थिति पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।
हिमफेड के माध्यम से प्रदेशभर में करीब 85 स्टोरों के जरिए निजी दुकानदारों और सरकारी डिपुओं तक खाद पहुंचाई जाती है। ऐसे में इफको की सप्लाई रुकने का सीधा असर प्रदेश की खाद आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ सकता है।
फिलहाल प्रदेश में यूरिया की उपलब्धता बनी हुई है, लेकिन डीएपी और एनपीके की नियमित आपूर्ति को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि पिछले करीब चार महीनों से खाद की उपलब्धता को लेकर परेशानी सामने आ रही है।
किसान जसविंदर सिंह ने बताया कि फिलहाल यूरिया आसानी से मिल रही है, लेकिन डीएपी और एनपीके की पर्याप्त सप्लाई नहीं पहुंच रही, जिससे खेती प्रभावित हो रही है।
वहीं किसान प्रेम चंद ने कहा कि सितंबर में आलू की खेती शुरू होने के साथ एनपीके खाद की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में यदि समय पर पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं हुई तो किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
इफको के क्षेत्रीय प्रबंधन पवन कुमार के अनुसार हिमफेड पर करीब 5.50 करोड़ रुपये की देनदारी है। इसी वजह से हिमफेड को खाद की आपूर्ति बंद की गई है। उन्होंने कहा कि यदि उच्च अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई नया आदेश मिलता है तो उसके अनुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।
इफको की सप्लाई रुकने के बाद हिमफेड ने अब इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) से खाद खरीदना शुरू कर दिया है। आईपीएल की ओर से करीब 250 टन यूरिया हिमफेड को भेजी गई है।
हिमफेड ऊना के विपणन सहायक कमलेश कुमार ने बताया कि प्रदेश में हिमफेड के करीब 85 स्टोर हैं, जहां से निजी दुकानदारों और सरकारी डिपुओं को खाद की आपूर्ति की जाती है। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत आईपीएल से खाद मंगवाई जा रही है, हालांकि मांग के मुकाबले अभी भी खाद की आपूर्ति कम है।
अब बड़ा सवाल यह है कि हिमफेड और इफको के बीच देनदारी का मामला कब सुलझता है और किसानों को डीएपी व एनपीके की पर्याप्त आपूर्ति कब तक सुनिश्चित हो पाती है। आगामी फसल सीजन को देखते हुए किसानों की नजर अब सरकार और संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी है।