
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की भारतीय वायुसेना के विमानों से की गई विदेश यात्राओं के उड़ान रिकॉर्ड सार्वजनिक करने के केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि ऐसी संवेदनशील जानकारी का खुलासा राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
न्यायमूर्ति अमित महाजन ने एयर हेडक्वार्टर्स के पर्सनल सर्विसेज निदेशालय के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी की याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि वायुसेना ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम की धारा 8(1)(a) और 8(1)(g) के तहत जानकारी देने से इनकार करके उचित कदम उठाया था।
केंद्रीय सूचना आयोग ने 8 जुलाई 2020 को वायुसेना को निर्देश दिया था कि वह नरेंद्र मोदी और मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओं से संबंधित उपलब्ध स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स (SFR-II) की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराए। हाई कोर्ट ने इस आदेश को निरस्त कर दिया।
अदालत ने कहा कि सुरक्षा कर्मियों के नाम और पहचान संबंधी विवरण हटाने के बाद भी उड़ान रिकॉर्ड सार्वजनिक करने से संभावित सुरक्षा जोखिम समाप्त नहीं होते। इन दस्तावेजों में विमान, एयरक्रू, यात्रियों और विशेष सुरक्षा समूह (SPG) के कर्मियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हो सकती है।
अदालत के अनुसार, इन विवरणों का अन्य सार्वजनिक सूचनाओं के साथ विश्लेषण करने पर सुरक्षा व्यवस्था और तैनाती के पैटर्न का पता लगाया जा सकता है। न्यायमूर्ति महाजन ने स्पष्ट किया कि विदेश यात्राओं पर सार्वजनिक धन खर्च होने का तथ्य अपने आप में सुरक्षा को प्रभावित करने वाली जानकारी जारी करने का पर्याप्त आधार नहीं है।
अदालत ने यह भी कहा कि जब सक्षम प्राधिकारी सुरक्षा जोखिम का आकलन कर चुका हो, तो केंद्रीय सूचना आयोग या न्यायालय को सुरक्षा एजेंसियों के आकलन की जगह अपना आकलन नहीं थोपना चाहिए।
यह मामला सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश के. बत्रा की ओर से 5 जून 2018 को दायर आरटीआई आवेदन से जुड़ा है। उन्होंने 1 अप्रैल 2013 से आवेदन की तारीख तक प्रधानमंत्रियों की भारतीय वायुसेना के विमानों से हुई विदेश यात्राओं का विवरण मांगा था।
वायुसेना ने नरेंद्र मोदी की कुछ यात्राओं की जानकारी उपलब्ध कराई थी। साथ ही बताया था कि 1 अप्रैल 2013 से 25 मई 2014 के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वायुसेना के विमान से कोई यात्रा नहीं की थी। हालांकि, उड़ान रिकॉर्ड के पार्ट-I और पार्ट-II की प्रतियां देने से इनकार कर दिया गया था।
लोकेश के. बत्रा ने दलील दी थी कि विदेश यात्राओं पर सार्वजनिक धन खर्च होने के कारण उड़ान रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने चाहिए। दूसरी ओर, वायुसेना ने सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़े जोखिमों का हवाला दिया था।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सार्वजनिक धन खर्च होने की दलील को जानकारी जारी करने के लिए पर्याप्त नहीं माना और सुरक्षा संबंधी आधार पर वायुसेना के फैसले को उचित ठहराया।