
चंडीगढ़: पंजाब में मानसून के पहले महीने जुलाई में सामान्य से 26 फीसदी कम बारिश दर्ज होने से खेती, सिंचाई और बिजली उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में राज्य में सामान्य 161.4 मिलीमीटर वर्षा के मुकाबले केवल 119.3 मिलीमीटर बारिश हुई। कम बारिश का असर अब प्रमुख बांधों के जलस्तर पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
इस बार पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर और फरीदकोट को छोड़कर राज्य के अधिकांश जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई। कई जिलों में बारिश की कमी 71 फीसदी तक दर्ज की गई। सबसे अधिक 495.5 मिमी बारिश पठानकोट में हुई, जबकि सबसे कम 38.4 मिमी वर्षा मानसा जिले में रिकॉर्ड की गई।
कम बारिश का असर हिमाचल प्रदेश स्थित भाखड़ा और पौंग बांध समेत प्रमुख जलाशयों पर भी पड़ा है। वर्तमान में भाखड़ा बांध का जलस्तर 1599.33 फुट है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 21.67 फुट कम है। वहीं पौंग बांध का जलस्तर 1338.40 फुट दर्ज किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 15.69 फुट नीचे है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, हिमाचल स्थित भाखड़ा, पौंग और कोल बांधों में कुल जल भंडारण सामान्य से 10.83 फीसदी कम है। वहीं पंजाब के रणजीत सागर बांध में भी जल भंडारण सामान्य से 9.21 फीसदी कम दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगस्त में भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है और जलविद्युत उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, अल नीनो जैसी परिस्थितियां तथा बंगाल की खाड़ी से नमी वाले सिस्टम का पंजाब की ओर सक्रिय न होना कम बारिश की प्रमुख वजहें हैं। हालांकि मौसम विभाग ने 5 अगस्त तक पंजाब के कुछ जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे हालात में कुछ सुधार की उम्मीद है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त में अच्छी बारिश नहीं होने पर धान की फसल और अन्य खरीफ फसलों की सिंचाई चुनौती बन सकती है। ऐसे में किसानों और सरकार दोनों की निगाहें अब अगस्त के मानसून पर टिकी हैं।