
हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल कुल्लू-मनाली में इस बार मानसून ने पर्यटन कारोबार पर गहरा असर डाला है। अप्रैल से जून तक पर्यटकों की भारी भीड़ से गुलजार रहने वाला यह क्षेत्र जुलाई में लगभग सूना नजर आने लगा है। कई छोटे होटल खाली पड़े हैं, जबकि होटल संचालकों को कर्मचारियों को अस्थायी छुट्टी पर भेजने की नौबत आ गई है।
ग्रीन टैक्स बैरियर के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में अन्य राज्यों से मनाली आने वाली वोल्वो बसों की संख्या घटकर 30 से 45 प्रतिदिन रह गई है, जबकि पर्यटन सीजन में यह आंकड़ा 100 से अधिक होता था। वहीं, पर्यटकों के निजी वाहनों की संख्या भी घटकर 400 से 500 प्रतिदिन रह गई है। इसका सीधा असर होटल, रेस्तरां और पर्यटन से जुड़े अन्य कारोबारों पर पड़ा है।
पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि लगातार बारिश, भूस्खलन और सड़कों के बंद होने की खबरों से पर्यटक यात्रा करने से बच रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पुराने और भ्रामक बाढ़ व आपदा के वीडियो भी लोगों के मन में डर पैदा कर रहे हैं, जिससे पर्यटकों की आमद में भारी कमी आई है।
कुल्लू के पर्यटन विकास अधिकारी रोहित शर्मा ने बताया कि अप्रैल, मई और जून में पर्यटकों की अच्छी संख्या रही, लेकिन मानसून शुरू होते ही स्थिति बदल गई। वर्तमान में जिले के होटलों की औसत ऑक्यूपेंसी 30 से 40 प्रतिशत रह गई है।
वहीं, होटलियर एसोसिएशन मनाली के अध्यक्ष रोशन ठाकुर ने बताया कि कई होटलों की ऑक्यूपेंसी घटकर 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बारिश का दौर खत्म होने के बाद सितंबर से पर्यटकों की संख्या फिर बढ़ेगी।
स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों गजेंद्र ठाकुर, गौतम ठाकुर और भूपेश का कहना है कि हर साल मानसून के दौरान पर्यटन कारोबार धीमा पड़ता है। उन्हें उम्मीद है कि 20 सितंबर के बाद पर्यटक फिर से कुल्लू-मनाली का रुख करेंगे और यदि मौसम अनुकूल रहा तो आगामी विंटर सीजन पर्यटन उद्योग के लिए राहत लेकर आएगा।