
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार से शुरू हो गया है। सत्र शुरू होने से पहले ही सियासी पारा चढ़ गया। भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में विपक्ष लॉज के बाहर प्रदर्शन कर कांग्रेस सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विधायकों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
भाजपा नेता एवं विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि प्रदर्शन कांग्रेस सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ किया गया है। भाजपा ने सरकार पर चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाते हुए पांच लाख रोजगार देने की गारंटी को भी सवालों के घेरे में रखा।
वहीं, मानसून सत्र से पहले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई। बैठक में विपक्ष के संभावित हमलों का जवाब देने की रणनीति पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और विधायकों को निर्देश दिए कि प्रश्नकाल और शून्यकाल में उठने वाले सवालों के जवाब आंकड़ों और तथ्यों के साथ दिए जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 20 साल में पहली बार 10 दिन का विधानसभा सत्र बुलाया गया है। उन्होंने विपक्ष और नेता प्रतिपक्ष से सदन की कार्यवाही में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि विरोध और वॉकआउट किया जा सकता है, लेकिन सरकार को भी सदन में अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने चुनावी माहौल के बीच विपक्ष की ओर से हंगामा किए जाने की आशंका भी जताई।
भाजपा विधायक दल की बैठक नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई। बैठक में सरकार को विधानसभा के भीतर और बाहर घेरने की रणनीति तैयार की गई। भाजपा कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार के आरोपों, कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित मामलों, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, आपदा राहत कार्यों और कांग्रेस की चुनावी गारंटियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाएगी।
विपक्ष विधायकों पर दर्ज एफआईआर और पूछताछ के मामलों को लेकर भी सरकार पर हमला बोल सकता है। इन मुद्दों पर स्थगन प्रस्ताव लाए जाने की स्थिति में प्रश्नकाल के दौरान ही सदन में हंगामे के आसार हैं।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी सदस्यों को बोलने का पर्याप्त समय मिलेगा और जरूरत पड़ने पर सत्र की अवधि बढ़ाई भी जा सकती है।
सत्र की शुरुआत सुबह 11 बजे दिवंगत विधायक विजयेंद्र सिंह और पूर्व विधायक रामचंद्र भाटिया के निधन पर शोक प्रस्ताव से हुई। इसके बाद प्रश्नकाल और अन्य निर्धारित कार्यवाही होगी। राज्यपाल और राष्ट्रपति से स्वीकृत आठ विधेयकों की प्रतियां भी सदन के पटल पर रखी जाएंगी।
सत्र के दौरान नियम 130 के तहत दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा प्रस्तावित है। पहला प्रस्ताव प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों के निर्माणाधीन भवनों, आवश्यक उपकरणों, दवाओं की उपलब्धता, रिक्त पदों और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ा है। इसे विपिन सिंह परमार, नीरज नय्यर, डॉ. जनक राज और पवन कुमार काजल की ओर से लाया जाएगा।
दूसरा प्रस्ताव प्रदेश के जल संसाधनों, जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली फ्री पावर, जल उपकर की वसूली और राज्य के हितों के संरक्षण से संबंधित है। इसे विधायक केवल सिंह पठानिया उठाएंगे।
इसके अलावा शुक्रवार को विधायक विनोद सुल्तानपुरी और इंद्रदत्त लखनपाल की ओर से ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी लाए जाएंगे। ऐसे में पहले ही दिन विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामे के आसार बने हुए हैं।