
शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायतों के वाटरशेड फंड से कृषि उपकरणों की खरीद को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। कैंची खरीद मामले के बाद अब किन्नौर जिले के कल्पा विकास खंड की एक पंचायत में आरी (प्रूनिंग सॉ) की खरीद में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि बाजार में करीब 271 रुपये (जीएसटी अलग) में उपलब्ध आरी को 580 रुपये प्रति आरी की दर से खरीदा गया।
आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार पंचायत ने बड़ी संख्या में आरी खरीदीं और इन्हें कैंची के साथ लाभार्थियों में वितरित किया। आरोप है कि ये उपकरण किसानों को नि:शुल्क दिए जाने थे, लेकिन इसके बावजूद लाभार्थियों से कुल कीमत का 10 प्रतिशत राशि भी वसूली गई।
ग्रामीणों को बताया गया कि यह राशि पेयजल योजना की मरम्मत पर खर्च की जाएगी। अब इस पूरे मामले को लेकर सरकारी धन के उपयोग और खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
इससे पहले भी वाटरशेड फंड से कैंची खरीद को लेकर विवाद सामने आया था। आरोप था कि करीब 4,600 रुपये कीमत की कैंची 5,800 रुपये में खरीदी गई थी। अब आरी खरीद का मामला सामने आने के बाद पंचायतों में सरकारी खरीद प्रक्रिया पर फिर सवाल उठने लगे हैं।
आरी का उपयोग मुख्य रूप से सेब और अन्य फलदार पौधों की टहनियों की छंटाई के लिए किया जाता है। आरोप है कि सामान्य बाजार मूल्य से कहीं अधिक कीमत पर खरीद कर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका पैदा हुई है।
किन्नौर के उपायुक्त अमित कुमार शर्मा ने कहा कि यदि बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर आरी खरीदी गई है तो मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि नि:शुल्क वितरित किए जाने वाले उपकरणों के बदले लाभार्थियों से पैसे वसूले गए हैं, तो इस पहलू की भी जांच होगी।
वहीं, पंचायतीराज विभाग के सचिव सी. पाल रासू ने कहा कि यह मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं आया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में विस्तृत जानकारी जिला प्रशासन से प्राप्त की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।