
शिमला। हिमाचल प्रदेश में पशुओं को प्रभावित करने वाली लंपी स्किन डिजीज ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। सोलन जिले के नालागढ़ और कुनिहार क्षेत्र में करीब 40 पशुओं में संक्रमण की पुष्टि हुई है। वहीं सिरमौर में एक सप्ताह के भीतर लंपी जैसे लक्षण वाले पशुओं की संख्या दोगुनी होकर 1039 पहुंच गई है। इनमें 513 पशु उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 507 का उपचार चल रहा है। बीमारी के संभावित प्रकोप के बीच 19 पशुओं की मौत भी हुई है।
सोलन के नालागढ़ और कुनिहार क्षेत्र में करीब 40 पशुओं में लंपी संक्रमण की पुष्टि हुई है। पंजाब और हरियाणा से सटे होने के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में पहले से ही पशुओं की आवाजाही पर निगरानी रखी जा रही थी। संक्रमण की पुष्टि के बाद प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और बढ़ा दी गई है।
पशुपालन विभाग ने लंपी से बचाव के लिए सोलन में 90,500 वैक्सीन डोज मंगवाई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने पर जोर दिया जा रहा है।
सिरमौर में स्थिति ने ज्यादा चिंता बढ़ाई है। एक सप्ताह पहले की तुलना में लंपी जैसे लक्षण वाले पशुओं की संख्या दोगुनी होकर 1039 हो गई है। पांवटा साहिब, माजरा, धौलाकुआं और कालाअंब के बाद अब धारटीधार क्षेत्र के कुछ गांवों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं।
विभाग के अनुसार बाहरी राज्यों से पशुओं की आवाजाही के दौरान संक्रमण जिले में पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सिरमौर में अब तक करीब 3000 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है और विभाग को 60 हजार वैक्सीन डोज उपलब्ध हो चुकी हैं। लंपी जैसे लक्षण वाले क्षेत्रों के अलावा अन्य इलाकों में भी टीकाकरण शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। गोशालाओं में सैनिटाइजेशन और पशुपालकों को जागरूक करने की तैयारी भी की जा रही है।
उपनिदेशक पशुपालन विभाग सिरमौर डॉ. राजीव वालिया ने बताया कि विभाग अलर्ट मोड पर है। उन्होंने पशुपालकों से सावधानी बरतने और किसी भी संदिग्ध लक्षण की स्थिति में तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करने की अपील की है।
पशुपालन विभाग ने फिलहाल पशुपालकों को बाहरी राज्यों से पशु खरीदने से बचने की सलाह दी है। यदि पशु खरीदना जरूरी हो तो उसकी स्वास्थ्य जांच करवाने और कुछ समय तक उसे अन्य पशुओं से अलग रखने को कहा गया है। किसी पशु में लंपी जैसे लक्षण दिखाई देने पर उसे तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग करने की सलाह दी गई है।
लंपी स्किन डिजीज एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय और भैंस को प्रभावित करती है। इसके प्रमुख लक्षणों में बुखार, त्वचा पर गांठें या गोल घाव, लिम्फ नोड्स में सूजन, आंख-नाक से स्राव, कमजोरी और दूध उत्पादन में कमी शामिल हैं।
यह बीमारी मुख्य रूप से मच्छरों, मक्खियों और कुछ टिक जैसे खून चूसने वाले कीड़ों के जरिए फैलती है। संक्रमित पशुओं की आवाजाही भी इसके प्रसार का कारण बन सकती है।
अच्छी बात यह है कि लंपी स्किन डिजीज इंसानों में नहीं फैलती। हालांकि इससे पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर गंभीर आर्थिक असर पड़ सकता है।