
शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से पहले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के मंत्रिमंडल विस्तार और विभागीय फेरबदल की चर्चाओं ने राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे और कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई बैठकों के बाद सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर बड़े बदलाव की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
शुक्रवार को नई दिल्ली में मुख्यमंत्री सुक्खू, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार और प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल ने कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की। बैठक में सरकार और संगठन के कामकाज की समीक्षा के साथ-साथ मंत्रिमंडल विस्तार, रिक्त पदों पर नियुक्तियां और संगठनात्मक पुनर्गठन पर चर्चा हुई।
प्रदेश मंत्रिमंडल में फिलहाल एक कैबिनेट मंत्री का पद और विधानसभा उपाध्यक्ष का पद रिक्त है। ऐसे में मानसून सत्र से पहले इन पदों पर नियुक्तियां होने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार मंत्री पद की दौड़ में कुल्लू सदर के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर और ज्वालाजी के विधायक संजय रतन के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। सुंदर सिंह ठाकुर के दिल्ली पहुंचने के बाद राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला है। माना जा रहा है कि क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन के साथ-साथ 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर नए चेहरे को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।
राजनीतिक सूत्रों का यह भी कहना है कि कुछ मंत्रियों के विभागों में फेरबदल हो सकता है। चर्चा है कि राजेश धर्माणी और यादवेंद्र गोमा को नए विभागों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। हालांकि सरकार की ओर से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
सरकार के साथ-साथ कांग्रेस संगठन में भी बदलाव की तैयारी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी में सचिवों और प्रवक्ताओं की नई सूची जल्द जारी होने की संभावना है। वहीं कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) की बैठक अब धर्मशाला के बजाय कसौली में आयोजित किए जाने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री सुक्खू शनिवार को दिल्ली से चंबा दौरे पर रवाना होंगे, जहां वह रविवार को अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले सहित कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। सोमवार को उनके शिमला लौटने का कार्यक्रम है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने उद्योगों के लिए भी बड़ा फैसला घोषित किया है। अब राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से उद्योगों को वन टाइम सहमति (एनओसी) प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा, जिसकी वैधता 5 से 25 वर्ष तक होगी। इससे प्रदेश के करीब 12,500 पंजीकृत उद्योगों को बार-बार एनओसी लेने की प्रक्रिया से राहत मिलेगी। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा और उद्योगों को अनावश्यक दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।