
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के 15 फीसदी लंबित महंगाई भत्ते (डीए), उससे जुड़े एरियर और लंबित किस्तों के भुगतान के मामले में राज्य सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की अदालत ने याचिकाकर्ताओं को चार सप्ताह के भीतर संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही अदालत ने संबंधित प्राधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वह 12 सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार स्पष्ट और कारण सहित आदेश पारित कर निर्णय ले।
अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना याचिकाओं का निपटारा करते हुए अधिकारियों को तय समयसीमा में कर्मचारियों की शिकायतों पर विचार करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार लंबे समय से कर्मचारियों और पेंशनरों का महंगाई भत्ता जारी नहीं कर रही है। इस संबंध में हाईकोर्ट ने पहले राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा था, लेकिन सरकार की ओर से निर्धारित समय में जवाब दाखिल नहीं किया गया। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन देने का निर्देश दिया।
याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को 60 प्रतिशत डीए दे रही है, जबकि हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों को केवल 45 प्रतिशत डीए मिल रहा है। कर्मचारियों ने अदालत से मांग की थी कि 1 जुलाई 2024 से लंबित सभी डीए किस्तें केंद्र सरकार की तर्ज पर जारी की जाएं और बकाया एरियर का भी भुगतान किया जाए।
याचिका के अनुसार जुलाई 2023 से जनवरी 2026 के बीच डीए में कई बार बढ़ोतरी हुई, लेकिन उसका भुगतान नहीं किया गया। इसमें जुलाई 2023 और जनवरी 2024 में 4-4 प्रतिशत, जुलाई 2024 में 3 प्रतिशत, जनवरी 2025 में 2 प्रतिशत, जुलाई 2025 में 3 प्रतिशत और जनवरी 2026 में 2 प्रतिशत डीए लंबित है। इस प्रकार कर्मचारियों और पेंशनरों का कुल 15 प्रतिशत महंगाई भत्ता अभी तक बकाया है।
वहीं राज्य सरकार का कहना है कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति और कर्मचारियों की बढ़ती वित्तीय देनदारियों के कारण लंबित डीए का भुगतान समय पर नहीं हो सका है।