हिमाचल में कर्मचारियों की सीनियोरिटी और प्रमोशन की फिर होगी समीक्षा, मुख्य सचिव के निर्देश; अनुबंध सेवाकाल भी जुड़ेगा
हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की वरिष्ठता (सीनियोरिटी) और पदोन्नति (प्रमोशन) से जुड़े मामलों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार ने कर्मचारियों की पुरानी वरिष्ठता सूचियों और पहले हो चुकी पदोन्नतियों की दोबारा समीक्षा करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट से हिमाचल प्रदेश सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद मुख्य सचिव केके पंत ने सभी प्रशासनिक विभागों को न्यायालय के फैसले के अनुरूप कार्रवाई करने को कहा है। सरकार के नए निर्देशों के अनुसार, अब प्रभावित कर्मचारियों की अनुबंध सेवा अवधि को भी वरिष्ठता निर्धारित करने की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इसके लिए विभागों को पहले अस्थायी वरिष्ठता सूची तैयार करनी होगी। इसके बाद आपत्तियों और संबंधित सेवा रिकॉर्ड की जांच कर अंतिम वरिष्ठता सूची जारी की जाएगी। नई वरिष्ठता सूची के आधार पर पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़े मामलों की भी समीक्षा होगी। पहले हो चुके प्रमोशन की भी होगी समीक्षा सरकार के आदेशों का असर केवल उन कर्मचारियों पर नहीं पड़ेगा, जो अभी पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं, बल्कि पहले प्रमोशन पा चुके कर्मचारियों की स्थिति भी बदल सकती है। यदि किसी कर्मचारी को पहले पदोन्नति मिल चुकी है, लेकिन अनुबंध सेवाकाल को वरिष्ठता में जोड़ने के बाद वह संबंधित कैडर में वरिष्ठता क्रम में नीचे आ जाता है, तो उसकी पहले हुई विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की दोबारा समीक्षा की जाएगी। वहीं, संशोधित वरिष्ठता सूची के आधार पर यदि किसी दूसरे कर्मचारी की पदोन्नति की पात्रता पहले की तारीख से बनती है, तो उसके मामले में भी रिव्यू डीपीसी या नई डीपीसी आयोजित की जाएगी। हालांकि, केवल वरिष्ठता बदलने से किसी कर्मचारी को स्वतः पदोन्नति नहीं मिलेगी। इसके लिए निर्धारित भर्ती नियमों और विभागीय प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा। नहीं बनाए जाएंगे अतिरिक्त पद, आर्थिक लाभ पर भी स्थिति स्पष्ट सरकार ने अपने निर्देशों में स्पष्ट किया है कि वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए अतिरिक्त सुपरन्यूमरेरी पद सृजित नहीं किए जाएंगे। कर्मचारियों को मिलने वाले वित्तीय लाभों का निर्धारण भी संबंधित डीपीसी के निर्णय और लागू नियमों के आधार पर किया जाएगा। सामान्य तौर पर कर्मचारियों को वित्तीय लाभ नॉशनल आधार पर दिए जाएंगे। यानी वरिष्ठता या पदोन्नति की पात्रता पहले की तारीख से निर्धारित होने पर भी पिछली अवधि का वास्तविक वेतन अंतर स्वतः नहीं मिलेगा। हालांकि, यदि किसी सक्षम न्यायालय ने स्पष्ट रूप से किसी कर्मचारी को पात्रता की तारीख से वित्तीय लाभ देने के निर्देश दिए हैं, तो उस आदेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, पहले से पदोन्नत कर्मचारी की पदोन्नति वास्तविक रूप से नए पद का कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी रहेगी। नई पदोन्नति के मामलों में भी लाभ संबंधित पद का कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से ही लागू होगा। 2024 के कर्मचारी अधिनियम पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का फैसला बना आधार दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 से हुई थी। इस अधिनियम के जरिए अनुबंध आधार पर की गई सेवा को वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभों के निर्धारण से अलग रखने का प्रावधान किया गया था। इस कानून को कर्मचारियों की ओर से हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने 25 अप्रैल 2026 को देवेंद्र कुमार एवं अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार मामले में इस अधिनियम को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हालांकि, 29 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी और फैसले पर अमल करने के लिए सरकार को चार महीने का समय दिया। इसके बाद सरकार ने राहत पाने के लिए पुनर्विचार याचिका दायर की, लेकिन 27 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उसे भी खारिज कर दिया। किन कर्मचारियों को मिल सकता है लाभ? इस फैसले का संबंध मुख्य रूप से उन सरकारी कर्मचारियों से है, जिन्होंने निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत अनुबंध आधार पर नियुक्ति प्राप्त की और बाद में नियमित हुए। ऐसे पात्र कर्मचारियों की अनुबंध सेवा को वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभों के निर्धारण में शामिल करने का रास्ता खुला है। हालांकि, इसका लाभ सभी अनुबंध कर्मचारियों को स्वतः नहीं मिलेगा। कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया, भर्ती नियम, अनुबंध सेवाकाल, नियमितीकरण की तारीख और न्यायालयों के संबंधित आदेशों के आधार पर पात्रता तय की जाएगी। साथ ही, उन कर्मचारियों के मामलों में भी कानूनी स्थिति देखी जाएगी, जिन्होंने अपने अधिकारों के लिए पहले अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया था। ऐसे कर्मचारियों को समान मामले में दूसरे कर्मचारियों को मिली राहत के आधार पर स्वतः लाभ मिलने की गारंटी नहीं है। अब संबंधित विभागों को कर्मचारियों का पूरा सेवा रिकॉर्ड जांचकर अस्थायी और अंतिम वरिष्ठता सूची तैयार करनी होगी। इसके बाद रिव्यू डीपीसी और फ्रेश डीपीसी के माध्यम से पदोन्नति के मामलों पर निर्णय लिया जाएगा। सभी अंतिम आदेश संबंधित प्रशासनिक विभागों के सचिव के स्तर पर मंजूर होंगे। सरकार के इन निर्देशों से प्रदेश के उन कर्मचारियों की वरिष्ठता और पदोन्नति की स्थिति नए सिरे से निर्धारित होने का रास्ता साफ हुआ है, जिनकी नियुक्ति अनुबंध आधार पर हुई थी और जो बाद में नियमित हुए।

