अंबाला कैंट। हरियाणा के अंबाला कैंट में अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की योजनाओं के तहत फर्जी दस्तावेज लगाकर सरकारी ऋण लेने का मामला सामने आया है। निगम की शिकायत पर महेश नगर थाना पुलिस ने तत्कालीन जिला प्रबंधक चंद्र प्रकाश समेत 8 लाभार्थियों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। निगम के अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2020, 2021 और 2022 के दौरान स्वरोजगार के लिए दिए जाने वाले ऋण में कथित तौर पर फर्जीवाड़ा किया गया। आरोप है कि कुछ लोगों ने अनुसूचित जाति की पात्रता दिखाने के लिए जाली या छेड़छाड़ किए गए जाति प्रमाण पत्र लगाए और सरकारी योजना का लाभ लेकर ऋण राशि हासिल की। 💰 8 लोगों ने फर्जी दस्तावेजों से लिया लोन निगम की प्रारंभिक जांच में 8 लाभार्थियों के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। इनमें दलीप कुमार, विवेक कुमार और नवीन कुमार पर ओबीसी वर्ग से होने के बावजूद कथित तौर पर फर्जी SC प्रमाण पत्र के आधार पर 60-60 हजार रुपये का लोन लेने का आरोप है। वहीं अनुपमा ने 60 हजार, पूनम ने 75 हजार, तारा देवी ने 75 हजार और मीनाक्षी ने 75 हजार रुपये का ऋण लिया। जांच में इनके SC प्रमाण पत्रों में कथित तौर पर छेड़छाड़ सामने आई। इसके अलावा पटेल नगर निवासी जतिन पर आरोप है कि उसने अल्पसंख्यक योजना के तहत खुद को ईसाई बताकर 1 लाख रुपये का ऋण हासिल किया, जबकि जांच में उसके ब्राह्मण जाति से संबंधित होने की बात सामने आई। 🔍 तत्कालीन जिला प्रबंधक की भूमिका पर भी सवाल निगम की शिकायत में तत्कालीन जिला प्रबंधक चंद्र प्रकाश की भूमिका को संदिग्ध बताया गया है। अधिकारियों को आशंका है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऋण स्वीकृत करने में उनकी मिलीभगत हो सकती है। निगम ने पुलिस से मांग की है कि पूरे मामले की जांच की जाए और यदि दलालों या अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाए। 👮 पुलिस ने दर्ज की FIR निगम के अधीक्षक योगेश कुमार की शिकायत और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर महेश नगर थाना पुलिस ने FIR नंबर 286, दिनांक 27 अगस्त 2026 दर्ज की है। मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, इन्हें सत्यापित कैसे किया गया और सरकारी लोन की मंजूरी में किन-किन लोगों की भूमिका रही। ⚠️ अब होगी पूरे नेटवर्क की जांच यह मामला सिर्फ 8 लाभार्थियों तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था, पुलिस इसकी भी जांच कर रही है। दलालों, निगम के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका सामने आने पर कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। फिलहाल पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी।