
देहरादून। उत्तराखंड की आनंदम पाठ्यचर्या ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई पहचान दिलाई है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में आयोजित सामाजिक परिणाम सम्मेलन में उत्तराखंड के आनंदम मॉडल की चर्चा हुई और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने इसकी सराहना की। शिक्षा विभाग, समग्र शिक्षा के स्टाफ ऑफिसर भगवती प्रसाद मैंदोली ने सम्मेलन में राज्य के शिक्षा परिवर्तन मॉडल को प्रस्तुत किया।
सम्मेलन में आनंदम मॉडल की प्रस्तुति की शुरुआत संस्कृत मंगलाचरण और ध्यान अभ्यास से हुई। मैंदोली ने बताया कि संस्कृत मंत्र और ध्यान के माध्यम से शिक्षा में मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और बच्चों के समग्र विकास के महत्व को सामने रखा गया।
आनंदम पाठ्यचर्या का उद्देश्य बच्चों में केवल शैक्षणिक क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मविश्वासी, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। इसके तहत बच्चों को अपनी भावनाओं को पहचानने, दूसरों को समझने और सहानुभूति विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2019 में आनंदम पाठ्यचर्या की शुरुआत की थी। विद्यालयों में प्रतिदिन करीब 30 से 35 मिनट सामाजिक-भावनात्मक विकास के लिए निर्धारित किए जाते हैं। इसमें सचेतनता, कहानी, संवादात्मक गतिविधियां और अभिव्यक्ति जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
वर्तमान में आनंदम पाठ्यचर्या करीब 16 हजार विद्यालयों तक पहुंच चुकी है। इससे लगभग 30 हजार शिक्षक और दो लाख विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं। शोध अध्ययनों में बच्चों की एकाग्रता, सहानुभूति और आपसी संबंधों में सकारात्मक बदलाव सामने आए हैं। साथ ही शिक्षकों के कक्षा प्रबंधन में भी सुधार देखा गया है।
मैंदोली ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव केवल नीतियां बनाने या योजनाओं को बड़े स्तर पर लागू करने से नहीं आता। असली परिवर्तन तब होता है जब नीतियां विद्यालयों और कक्षाओं तक पहुंचती हैं और शिक्षक उन्हें बच्चों के जीवन में सार्थक बदलाव में बदलते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान के साथ आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता, कल्याण तथा सामाजिक-भावनात्मक अधिगम भी बच्चों के समग्र विकास के लिए जरूरी हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्तराखंड के आनंदम मॉडल की सराहना प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। मैंदोली ने इसकी सफलता का श्रेय राज्य सरकार के सहयोग और समर्पित शिक्षकों को दिया।