
NEET-UG 2026 विवाद और 36 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे युवाओं की बड़ी जीत बताया है। जंतर-मंतर से प्रदर्शन समाप्त करने के बाद पार्टी ने दावा किया कि यह सिर्फ शुरुआत है और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण है और युवाओं ने यह साबित कर दिया है कि उनकी आवाज़ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आंदोलन फिलहाल वापस लिया गया है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग जारी रहेगी।
पार्टी का दावा है कि सरकार ने पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने के सिद्धांत पर सहमति जताई है। साथ ही सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने और पेपर लीक मामलों में कड़ी कार्रवाई के लिए कानून में संशोधन की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
CJP ने कहा कि बिना किसी पारंपरिक राजनीतिक संगठन के, केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म और युवाओं के समर्थन से देशभर में बड़ा आंदोलन खड़ा किया गया। इस आंदोलन में छात्रों के साथ अभिभावक, डॉक्टर, वकील और समाज के विभिन्न वर्गों ने भी भाग लिया।
सरकार ने पेपर लीक मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें बनाने और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन की तैयारी शुरू कर दी है। प्रस्तावित संशोधन में दोषियों के लिए 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना और 10 साल तक की सजा का प्रावधान किए जाने की बात कही गई है।
CJP ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी शुरुआत है।