
केंद्रीय मंत्रिपरिषद से रवनीत सिंह बिट्टू के इस्तीफे के बाद पंजाब की राजनीति में नए सियासी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर बिट्टू का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही फिलहाल केंद्र सरकार में पंजाब से कोई मंत्री नहीं बचा है।
रवनीत सिंह बिट्टू रेल और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री थे। जून 2026 में उनका राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो गया था, जिसके बाद भाजपा ने उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा। हालांकि संवैधानिक प्रावधानों के तहत वह दिसंबर 2026 तक मंत्री बने रह सकते थे, लेकिन उन्होंने इससे पहले ही पद छोड़ दिया।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक भाजपा अब रवनीत सिंह बिट्टू को पंजाब में अपने बड़े चुनावी चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। बिट्टू भी संकेत दे चुके हैं कि अब उनका फोकस पूरी तरह पंजाब की राजनीति पर रहेगा और वह विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बेअंत सिंह के पोते होने के कारण भाजपा उन्हें जाट सिख चेहरे के रूप में मजबूत करने की कोशिश कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में बिट्टू आम आदमी पार्टी सरकार और कांग्रेस के खिलाफ और आक्रामक राजनीतिक अभियान चला सकते हैं।
इस्तीफे से एक दिन पहले बिट्टू ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर पंजाब की लंबित रेलवे परियोजनाओं को जल्द पूरा करने की मांग की थी। अब मंत्री पद से हटने के बाद इन परियोजनाओं के समन्वय और उनकी राजनीतिक भूमिका पर भी नजर रहेगी।
बिट्टू के इस्तीफे के बाद मोदी मंत्रिपरिषद में पंजाब का प्रतिनिधित्व खत्म हो गया है। वहीं भाजपा ने हाल ही में तरुण चुघ को राज्यसभा भेजा है। ऐसे में भविष्य में मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल के दौरान पंजाब से नए चेहरे को मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है।
रवनीत सिंह बिट्टू पिछले कुछ समय से पंजाब में कानून-व्यवस्था, नशे के कारोबार और अकाल तख्त से जुड़े मुद्दों को लेकर भगवंत मान सरकार पर लगातार हमला बोलते रहे हैं। अब मंत्री पद छोड़ने के बाद उनके पंजाब की राजनीति में और सक्रिय होने की संभावना है।