
उत्तराखंड में सरकारी वेबसाइटों पर होने वाले साइबर हमलों को लेकर नया ट्रेंड सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि हैकर्स छुट्टी वाले दिन या सप्ताहांत को निशाना बना रहे हैं, ताकि कम ट्रैफिक और सीमित निगरानी का फायदा उठाकर आसानी से अपने मंसूबों को अंजाम दे सकें।
प्रदेश का सबसे बड़ा साइबर हमला 2 अक्टूबर 2024 (गांधी जयंती) को हुआ था, जब 90 से अधिक सरकारी वेबसाइटें ठप हो गई थीं। इसके बाद 14 अप्रैल (डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती) के सरकारी अवकाश पर भी साइबर हमला दर्ज किया गया। हाल ही में सामने आए कथित चीनी हैकर्स के हमले की घटना भी शनिवार को हुई, जब सचिवालय समेत कई सरकारी कार्यालयों में अवकाश रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, छुट्टी के दिनों में वेबसाइटों पर ट्रैफिक कम होने और निगरानी सीमित रहने के कारण हैकर्स के लिए हमला करना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।
जानकारों का कहना है कि चीनी हैकर्स अक्सर मालवेयर के जरिए वेबसाइटों में सेंध लगाकर उनके लॉगिन क्रेडेंशियल (यूजरनेम, ईमेल और पासवर्ड) चुराने की कोशिश करते हैं। हालांकि, उत्तराखंड की सरकारी वेबसाइटों से इस तरह की कोई जानकारी चोरी हुई है या नहीं, इसकी जांच जारी है।
आईटीडीए (IT Development Agency) के निदेशक आलोक पांडे ने कहा कि हालिया मामले में केवल एक मालवेयर मिला था। उनके अनुसार, रोजाना लाखों मालवेयर इंटरनेट पर आते हैं और हर मालवेयर को साइबर हमला नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वेबसाइटों से किसी प्रकार के लॉगिन डेटा की चोरी की पुष्टि नहीं हुई है।