
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता लगातार बनी हुई है और कई इलाकों में बारिश का दौर लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। देहरादून और हरिद्वार में जलभराव, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और मलबा आने की आशंका के बीच मौसम विभाग ने आज नौ जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद प्रशासन भी संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तराखंड में अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय रह सकता है। खासकर पहाड़ी जिलों में कहीं-कहीं तेज बारिश होने की स्थिति में नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर बढ़ने, भूस्खलन होने और सड़क मार्ग बाधित होने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से मौसम को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है।
मौसम विभाग ने उत्तरकाशी, चमोली समेत नौ जिलों में भारी बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। पर्वतीय इलाकों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए तेज बारिश का असर सड़क और यातायात व्यवस्था पर पड़ सकता है।
पहाड़ों में बारिश के दौरान कई जगहों पर ढलान कमजोर हो जाते हैं। ऐसे में चट्टानों के खिसकने और सड़क पर मलबा आने से अचानक यातायात बाधित हो सकता है। मौसम विभाग पहले भी उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में भारी बारिश के दौरान लैंडस्लाइड, रॉकफॉल और मलबे से सड़कें बंद होने जैसी परिस्थितियों की चेतावनी देता रहा है।
मैदानी क्षेत्रों में भी लगातार बारिश का असर दिखाई दे रहा है। देहरादून और हरिद्वार के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित हो रहा है, वहीं निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।
भारी बारिश के दौरान शहरी क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है। यदि कम समय में ज्यादा बारिश होती है तो निचले इलाकों में पानी तेजी से जमा हो सकता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से जलभराव वाले क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है।
उत्तराखंड में मानसून के दौरान सबसे बड़ी चुनौती पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और रॉकफॉल की रहती है। उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी और अन्य पहाड़ी जिलों में लगातार बारिश होने पर कमजोर पहाड़ी ढलानों से मलबा सड़क पर आ सकता है।
इसका सीधा असर स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों और यात्रियों पर पड़ता है। सड़क बंद होने से कई गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों का संपर्क भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में प्रशासन को संवेदनशील सड़कों और भूस्खलन संभावित स्थानों पर विशेष निगरानी रखने की जरूरत है।
भारी बारिश के बीच नदी, नाले और बरसाती गदेरों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में ऊपरी हिस्सों में हुई बारिश का असर कुछ समय बाद निचले इलाकों में दिखाई देता है। इसलिए स्थानीय लोगों को नदी-नालों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी जाती है।
बारिश के दौरान पर्यटकों के लिए भी यह बेहद जरूरी है कि वे नदी किनारे या ऐसे स्थानों पर न जाएं जहां अचानक पानी बढ़ने की आशंका हो। मौसम विभाग की चेतावनी को नजरअंदाज करना जोखिम भरा साबित हो सकता है।
उत्तराखंड में इन दिनों बड़ी संख्या में पर्यटक और तीर्थयात्री पहाड़ों का रुख कर रहे हैं। बारिश के बीच पर्वतीय सड़कों पर सफर करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कहीं मलबा आने या सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में यातायात रोकना पड़ सकता है।
ऐसे में यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले सड़क और मौसम की स्थिति की जानकारी जरूर लें। बारिश के दौरान अनावश्यक रूप से संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर जाने से बचना बेहतर होगा।
मौसम की मौजूदा स्थिति को देखते हुए उत्तराखंड में बारिश से जल्द पूरी तरह राहत मिलने के आसार नहीं हैं। 11 से 16 अगस्त के दौरान देश के कई हिस्सों के साथ उत्तराखंड में भी मानसून की सक्रियता बनी रहने का पूर्वानुमान है। इस दौरान अलग-अलग स्थानों पर बारिश, गरज-चमक और तेज बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं।
इस बीच प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र को अलर्ट रहने की जरूरत है, क्योंकि भारी बारिश के दौरान फ्लैश फ्लड, जलभराव और भूस्खलन जैसी घटनाएं अचानक सामने आ सकती हैं। मौसम विभाग के अलर्ट के मद्देनजर संबंधित विभागों को स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी के बीच लोगों से अपील की गई है कि वे स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन करें। नदी-नालों के आसपास जाने से बचें, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रुकने से बचें और बारिश के दौरान बेहद जरूरी होने पर ही यात्रा करें।
फिलहाल उत्तराखंड में मानसून सक्रिय बना हुआ है। उत्तरकाशी-चमोली समेत नौ जिलों में यलो अलर्ट के बीच अगले कुछ दिन पहाड़ी क्षेत्रों के लिए खास तौर पर संवेदनशील माने जा रहे हैं। लगातार बारिश के कारण जहां एक ओर मौसम सुहावना बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर भूस्खलन, जलभराव और सड़क बाधित होने का खतरा भी बरकरार है।