
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। 21 जुलाई को संसद मार्ग थाने में दर्ज पहली एफआईआर में हिंसा को सुनियोजित साजिश बताया गया है। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ को उकसाया गया और असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की जांच की जा रही है।
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के निर्देश पर मामले की जांच स्पेशल सेल को सौंप दी गई है। 20 जुलाई की घटना से जुड़े मामलों में दर्ज इस एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संबंधित कानूनों की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें दंगा, आपराधिक साजिश, हत्या के प्रयास, पुलिसकर्मियों पर हमला और हथियार छीनने जैसे आरोप शामिल हैं।
एफआईआर के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान भीड़ के एक हिस्से ने पुलिस पर पथराव किया, जिसमें कई पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए। आरोप है कि एक हवलदार पर हमला कर उसका हथियार छीन लिया गया, जबकि अन्य पुलिसकर्मियों के हथियार छीनने की भी कोशिश की गई। इन आरोपों की जांच जारी है।
जांच एजेंसियां अब सोशल मीडिया गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन के समर्थन में किए गए पोस्ट, डिजिटल प्रचार अभियान और कथित वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है। इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब पर सक्रिय कुछ इंफ्लुएंसर्स तथा डिजिटल मार्केटिंग से जुड़ी कंपनियों के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
जांच एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड, भुगतान के दस्तावेज, सोशल मीडिया पोस्ट और संबंधित पक्षों के बीच संभावित समन्वय का विश्लेषण कर रही हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।