
नई दिल्ली: दिल्ली में जमीन और मकानों के रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था अब पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। राजधानी के 30 गांवों में स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड वितरण की तैयारी अंतिम चरण में है। इसके साथ ही सरकार हर संपत्ति को यूनिक डिजिटल नंबर देने की दिशा में भी काम कर रही है। इस नई व्यवस्था से संपत्ति का मालिकाना हक, सीमाएं और सरकारी रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे।
अब तक लाल डोरा क्षेत्रों में जमीन का रिकॉर्ड पुराने नक्शों और सीमित दस्तावेजों पर आधारित था, जिसके कारण अक्सर मालिकाना हक को लेकर विवाद सामने आते थे। नई व्यवस्था के तहत ड्रोन सर्वे के माध्यम से प्रत्येक संपत्ति का सटीक डिजिटल नक्शा तैयार किया गया है। इसी आधार पर स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए जाएंगे, जो भविष्य में मालिकाना हक का महत्वपूर्ण प्रमाण बनेंगे।
राजस्व विभाग के अनुसार स्वामित्व प्रॉपर्टी कार्ड योजना के तहत अब तक 48 से अधिक गांवों का सर्वे पूरा हो चुका है। इनमें से पहले चरण में 30 गांवों के 8,582 लाभार्थियों को स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड दिए जाएंगे। सर्वे के दौरान खसरा-खतौनी और पुराने रिकॉर्ड का मिलान कर डिजिटल नक्शे तैयार किए गए हैं। जिन संपत्तियों पर विवाद है, उन्हें फिलहाल इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।
योजना के पहले चरण में दक्षिण-पश्चिम जिला सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। यहां मटियाला और नजफगढ़ क्षेत्र के 17 गांवों में 4,816 लोगों को स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड मिलेंगे। इसके अलावा बाहरी उत्तर जिले के 10 गांवों में 3,027, दक्षिण जिले के दो गांवों में 541 और उत्तर-पश्चिम जिले के एक गांव में 198 लाभार्थियों को कार्ड वितरित किए जाएंगे।
सरकार का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड बनने से अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा। राजस्व विभाग, डीडीए, एमसीडी, वन विभाग, पीडब्ल्यूडी और अन्य एजेंसियां एक ही प्रमाणित डिजिटल डाटा के आधार पर काम कर सकेंगी, जिससे प्रशासनिक विवादों में भी कमी आएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड से संपत्ति खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी, धोखाधड़ी की घटनाएं कम होंगी और लोगों को बैंक से ऋण लेने में भी आसानी होगी। कार्ड में क्यूआर कोड, डिजिटल नक्शा, खसरा नंबर, मालिक का विवरण, डिजिटल हस्ताक्षर और सुरक्षा फीचर्स शामिल होंगे, जिससे इसकी प्रमाणिकता सुनिश्चित की जा सकेगी।
हर संपत्ति को मिलेगा यूनिक डिजिटल रिकॉर्ड।
मालिकाना हक का प्रमाण होगा मजबूत।
बैंक से ऋण लेना होगा आसान।
जमीन से जुड़े विवादों में आएगी कमी।
क्यूआर कोड से कुछ सेकेंड में मिलेगी पूरी जानकारी।
डिजिटल मैपिंग से अवैध निर्माण पर लगेगी रोक।
सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय होगा।