
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार की लक्ष्मी योजना को शुरुआत से ही महिलाओं का अच्छा समर्थन मिल रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा पोर्टल लॉन्च किए जाने के बाद महज दो दिनों में योजना के लिए 1,47,225 महिलाओं ने पंजीकरण करा लिया है। इनमें से 10,286 आवेदनों की प्रक्रिया पूरी कर अंतिम रूप से जमा भी कर दी गई है।
सरकार के अनुसार, योजना शुरू होने के पहले 24 घंटे में ही 59 हजार से अधिक पंजीकरण हुए थे। रविवार को भी आवेदन की रफ्तार बनी रही और कुल पंजीकरण का आंकड़ा 1.47 लाख के पार पहुंच गया। दिल्ली सरकार ने इस योजना के तहत करीब 17 लाख महिलाओं को लाभ देने का लक्ष्य रखा है। शुरुआती आंकड़ों को देखते हुए माना जा रहा है कि यदि यही गति जारी रही तो आने वाले दिनों में पंजीकरण सरकार के लक्ष्य के करीब पहुंच सकता है।
आंकड़ों से यह भी साफ है कि महिलाओं ने ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पर भरोसा जताया है। बड़ी संख्या में आवेदकों ने न सिर्फ पंजीकरण कराया, बल्कि आवेदन को अंतिम रूप देकर जमा भी कर दिया।
योजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि 10 साल के दिल्ली निवास की शर्त लगाकर पूर्वांचल की महिलाओं को योजना से बाहर किया जा रहा है। उन्होंने सांसद या विधायक के हस्ताक्षर की अनिवार्यता और पिंक कार्ड जैसी शर्तों पर भी सवाल उठाते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की।
वहीं, प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक मुकेश शर्मा ने योजना को गरीब महिलाओं के साथ धोखा बताया। उन्होंने कहा कि स्थायी निवास, आय, बिजली बिल और अन्य पात्रता शर्तों के कारण किरायेदार, प्रवासी, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले मजदूर और कई जरूरतमंद महिलाएं योजना के लाभ से वंचित रह जाएंगी।
उधर, भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। भाजपा के मीडिया प्रमुख प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि आम आदमी पार्टी जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि स्थायी निवास जैसी पात्रता शर्तें पहले से कई सरकारी योजनाओं में लागू हैं और विधायक की सिफारिश की व्यवस्था भी वर्ष 2018 में तत्कालीन सरकार ने ही लागू की थी।