
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस महासंघ की ओर से शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व एसीपी केपी कुकरेती ने पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में दिए जा रहे राजनीतिक बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पुलिस कार्रवाई पर टिप्पणी करते समय तथ्यों और कानून का ध्यान रखा जाना चाहिए।
कुकरेती ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री को किसी पुलिस कार्रवाई के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पेलेट गन को लेकर लोगों में कई तरह की गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं, जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का पूरा संवैधानिक और मौलिक अधिकार है, लेकिन जब कोई भीड़ हिंसक हो जाती है, बैरिकेड तोड़ती है, पत्थरबाजी करती है और प्रशासन के निर्देशों की अनदेखी करती है, तब स्थिति अलग हो जाती है। ऐसी परिस्थितियों में पुलिस को कानून के दायरे में रहकर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने पड़ते हैं।
पूर्व एसीपी ने कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी के जीवन पर सीधा खतरा उत्पन्न हो जाए, तो कानून उसे आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार देता है। उन्होंने यह भी कहा कि घटनास्थल पर मौजूद वरिष्ठ अधिकारी को ही तत्काल निर्णय लेना पड़ता है, क्योंकि उस समय न तो मुख्यमंत्री, न गृह मंत्री और न ही अन्य उच्च अधिकारी मौके पर मौजूद होते हैं।
कुकरेती ने संसद पर हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला अराजकता का सबसे गंभीर रूप है और ऐसी घटनाओं से सख्ती से निपटना आवश्यक है।