
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर सेल थाना पुलिस ने देशभर में चल रहे साइबर इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और म्यूल अकाउंट सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब से कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करने और उसे आगे दूसरे खातों में भेजने के लिए म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल कर रहे थे।
पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क केवल एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार देश के कई हिस्सों से जुड़े हुए थे। आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को छिपाने, अलग-अलग खातों में भेजने और रकम की वास्तविक स्रोत तक पहुंच को मुश्किल बनाने के लिए किया जाता था। जांच के दौरान पुलिस को केरल से लेकर पंजाब तक फैले इस नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले।
दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर सेल ने मामले की जांच के दौरान पारंपरिक पुलिस जांच के साथ-साथ डिजिटल और वित्तीय लेनदेन का गहन विश्लेषण किया। साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, ट्रांजेक्शन पैटर्न और रकम के प्रवाह की जांच की गई। इसी दौरान पुलिस को ऐसे कई खातों की जानकारी मिली, जिनमें संदिग्ध तरीके से बड़ी संख्या में रकम का लेनदेन किया गया था।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने इन बैंक खातों से जुड़े लोगों और साइबर नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन के आधार पर अलग-अलग राज्यों में आरोपियों तक पहुंच बनाई गई। इसके बाद पुलिस टीमों ने केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब में कार्रवाई करते हुए नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पुलिस की जांच में सामने आया कि साइबर अपराधी लोगों को निवेश के नाम पर अपने जाल में फंसाते थे। ऑनलाइन माध्यमों से लोगों से संपर्क कर उन्हें कम समय में अधिक मुनाफे का लालच दिया जाता था। पीड़ितों से रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई जाती थी।
ठगी की रकम सीधे मुख्य आरोपियों के खातों में न पहुंचकर कई स्तरों पर बनाए गए म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर की जाती थी। इसके बाद रकम को दूसरे खातों में भेजकर उसकी पहचान और मूल स्रोत को छिपाने का प्रयास किया जाता था। इस तरह साइबर अपराधियों ने बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए ठगी की रकम को कई स्तरों पर घुमाने का नेटवर्क तैयार किया था।
साइबर अपराध की भाषा में म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल अवैध या ठगी से प्राप्त रकम को ट्रांसफर और निकालने के लिए किया जाता है। कई मामलों में खाताधारक अपने बैंक खाते को कमीशन या पैसे के लालच में दूसरे लोगों को इस्तेमाल करने के लिए दे देते हैं।
साइबर ठग इन खातों के जरिए पीड़ितों से प्राप्त रकम को पहले एक खाते में और फिर कई दूसरे खातों में ट्रांसफर करते हैं। इससे पुलिस के लिए रकम के वास्तविक स्रोत और मुख्य आरोपी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर सेल की इस कार्रवाई को इसी तरह के नेटवर्क के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
इस मामले की खास बात यह है कि आरोपियों के ठिकाने अलग-अलग राज्यों में पाए गए। पुलिस ने केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब में कार्रवाई की। इससे साफ है कि साइबर अपराधियों ने अलग-अलग राज्यों में मौजूद लोगों और बैंक खातों का इस्तेमाल कर एक व्यापक नेटवर्क तैयार किया था।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस सिंडिकेट में और कितने लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों ने अब तक कितने म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराए और इन खातों के जरिए कितनी रकम का लेनदेन किया गया।
नौ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। जांच एजेंसियां बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन के रिकॉर्ड को खंगाल रही हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साइबर ठगी से हासिल रकम किन-किन खातों में पहुंची और उसे आगे कहां ट्रांसफर किया गया।
पुलिस को उम्मीद है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली पुलिस की साइबर सेल लगातार ऐसे गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। खासकर निवेश के नाम पर होने वाली ऑनलाइन ठगी में अपराधी अलग-अलग राज्यों में बैठे लोगों को जोड़कर नेटवर्क तैयार करते हैं। ऐसे मामलों में बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर सेल की यह कार्रवाई बताती है कि पुलिस अब केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल फुटप्रिंट, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और मनी ट्रेल का विश्लेषण कर साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस सिंडिकेट ने देशभर में कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और म्यूल अकाउंट के जरिए कितनी रकम का लेनदेन किया गया।