
चुनावी वर्ष में विकास और जनकल्याण पर जोर, ग्रामीण सड़कों के लिए 31 करोड़ और भू-धंसाव रोकने के लिए 48 करोड़ रुपये का प्रावधान
गैरसैंण/उत्तराखंड। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के विकास कार्यों को गति देने और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त धनराशि सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। राज्य गठन के 25 वर्षों में पहली बार उत्तराखंड के बजट का आकार 1.19 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। अनुपूरक बजट में पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दी गई है, जिससे बुनियादी ढांचे के विकास और विभिन्न योजनाओं को रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री धामी के वर्तमान कार्यकाल के अंतिम विधानसभा सत्र में पेश किए गए इस बजट में युवाओं, खिलाड़ियों, ग्रामीण क्षेत्रों और पर्वतीय इलाकों की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। सरकार ने चुनावी वर्ष में जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए धन की कमी न होने देने पर भी विशेष ध्यान दिया है।
वर्ष 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ मेले को भव्य और दिव्य बनाने के लिए अनुपूरक बजट में 290 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से कुंभ से जुड़ी तैयारियों और आवश्यक सुविधाओं के विकास को गति देने पर जोर रहेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 31 करोड़ रुपये रखे गए हैं। वहीं, जोशीमठ समेत पर्वतीय क्षेत्रों में भू-धंसाव की चुनौती से निपटने के लिए 48 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन योजनाओं का उद्देश्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने के साथ पर्वतीय क्षेत्रों में सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाना है।
सरकार ने युवाओं को इंजीनियरिंग की निशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराने और खिलाड़ियों के लिए बेहतर खेल सुविधाएं विकसित करने के उद्देश्य से भी बजट में प्रावधान किए हैं। मुख्यमंत्री ने अनुपूरक बजट को विकसित और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने कहा कि राज्य में आर्थिक विकास, वित्तीय प्रबंधन और नवाचार के क्षेत्र में हुई प्रगति सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। सरकार का लक्ष्य विकास योजनाओं को गति देने के साथ जनकल्याण और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना है।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड सरकार के इस अनुपूरक बजट में बुनियादी ढांचे, धार्मिक आयोजन, ग्रामीण संपर्क और पर्वतीय क्षेत्रों की चुनौतियों को प्राथमिकता दी गई है। अब इन बजटीय प्रावधानों का वास्तविक लाभ योजनाओं के क्रियान्वयन और समयबद्ध खर्च पर निर्भर करेगा।