
पांवटा साहिब (सिरमौर): हिमाचल प्रदेश में बेहतर शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध करवाने के दावों के बीच सिरमौर जिले के शिक्षा खंड पांवटा साहिब की राजकीय प्राथमिक पाठशाला भुंगरनी आज भी अपने भवन के इंतजार में है। वर्ष 2012 में शुरू हुए इस स्कूल को 14 साल बाद भी अपना भवन नहीं मिल पाया है। हालात ऐसे हैं कि एक छोटे से कमरे में पांच कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इसी कमरे में कार्यालय, मिड-डे मील की रसोई और स्टोर भी चल रहे हैं।
स्कूल में वर्तमान में करीब 21 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। जगह की कमी के कारण नए दाखिले के लिए आने वाले बच्चों को बैठाने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। स्कूल प्रबंधन समिति और स्थानीय लोगों ने इस समस्या के जल्द समाधान की मांग उठाई है।
स्कूल भवन निर्माण के लिए कुछ वर्ष पहले करीब 6.30 लाख रुपये का बजट उपलब्ध करवाया गया था, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। स्कूल में दो शिक्षक, एक मिड-डे मील कर्मी और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि भवन बनने से बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और स्कूल में दाखिले भी बढ़ सकते हैं।
स्कूल प्रबंधन समिति की प्रधान सुरेशो कौर ने बताया कि वर्ष 2012 से स्कूल भुंगरनी सोसायटी भवन के एक कमरे में चल रहा है। इतने वर्षों बाद भी भवन के लिए जमीन नहीं मिल पाई है, जिससे बच्चों को बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि जमीन उपलब्ध करवाने के लिए पहल करेंगे।
पंचायत उपप्रधान गुरमीत सिंह ने कहा कि स्कूल खोले जा रहे हैं, लेकिन जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाना भी उतना ही आवश्यक है। उनके अनुसार, सोसायटी ने पांच वर्ष तक स्कूल को एक कमरा निशुल्क उपलब्ध करवाया था, लेकिन अब भी कक्षाएं उसी भवन में संचालित हो रही हैं।
भुंगरनी पंचायत के प्रधान तेजेंद्र सिंह ने बताया कि स्कूल भवन के लिए जमीन उपलब्ध करवाने के संबंध में लिखित मांग मिली है। पंचायत इस दिशा में हरसंभव प्रयास करेगी।
स्कूल प्रभारी बलबीर सिंह चौहान ने बताया कि समस्या से शिक्षा खंड कार्यालय और उप शिक्षा निदेशक को अवगत करवाया गया है। इस संबंध में पंचायत प्रधान को भी पत्र भेजा गया है।
वहीं, स्थानीय विधायक एवं पूर्व ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने कहा कि स्कूल भवन निर्माण के लिए करीब 6.30 लाख रुपये उपलब्ध करवाए गए थे, लेकिन जमीन नहीं मिलने के कारण काम शुरू नहीं हो पाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि जमीन उपलब्ध होने पर भवन निर्माण के लिए अतिरिक्त बजट की कमी नहीं आने दी जाएगी।
अब स्थानीय लोगों और अभिभावकों को उम्मीद है कि जमीन की समस्या का जल्द समाधान होगा, ताकि बच्चों को एक कमरे में पांच कक्षाओं के बीच पढ़ने की मजबूरी से राहत मिल सके और स्कूल को अपना भवन मिल पाए।