
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में चल रहे आंदोलन में भीड़ प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर रोड के सीमित हिस्से में अनुमति मिलने और मंच की फेसिंग कनॉट प्लेस की ओर होने के कारण प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर के अलावा टॉलस्टाय मार्ग, संसद मार्ग, जनपथ और कनॉट प्लेस तक फैले हुए हैं। इससे आंदोलन का मुख्य मंच सभी प्रदर्शनकारियों को एक जगह जोड़ने में नाकाम दिखाई दे रहा है।
जानकारी के अनुसार, नेतृत्व की ओर से एक समान और स्पष्ट संदेश नहीं मिलने के कारण प्रदर्शनकारी अलग-अलग स्थानों पर नारेबाजी और प्रदर्शन कर रहे हैं। कई बार पुलिस की रोक-टोक को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कहासुनी और हल्की झड़प की स्थिति भी बनी। संसद मार्च के बाद से कई प्रमुख सड़कें बंद होने के कारण राजधानी में ट्रैफिक भी प्रभावित हो रहा है और लोगों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि इससे पहले जंतर-मंतर पर हुए बड़े आंदोलनों में मंच की व्यवस्था ऐसी होती थी कि टॉलस्टाय मार्ग से अशोक रोड तक मौजूद प्रदर्शनकारी भी मंच से जुड़े रहते थे। जगह-जगह लगाए गए माइक और एलईडी स्क्रीन के जरिए दूर बैठे लोग भी नेताओं के संबोधन सुन पाते थे, जिससे भीड़ का बेहतर प्रबंधन संभव हो जाता था।
वहीं, मौजूदा आंदोलन में प्रदर्शन स्थल छोटा होने के कारण मंच के सामने की जगह जल्दी भर जाती है। इसके बाद आने वाले प्रदर्शनकारियों को वापस लौटना पड़ता है और वे आसपास की सड़कों पर फैलकर नारेबाजी करते रहते हैं। इससे भीड़ प्रबंधन और कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है। पुलिस की ओर से लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।