
वन भूमि सीमांकन पूरा होने तक निर्माण, विकास, म्यूटेशन और संपत्ति हस्तांतरण पर रोक, मुख्य सचिव को सख्त निर्देश भारतेंदु संवाददाता, चंडीगढ़।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के आसपास स्थित पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र को लेकर बड़ा और सख्त आदेश जारी किया है। अदालत ने मोहाली जिले के 16 गांवों में सभी प्रकार के निर्माण, विकास कार्य, भूमि हस्तांतरण और संपत्ति से जुड़े लेन-देन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक वन भूमि का सीमांकन पूरी तरह नहीं हो जाता, तब तक इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का निर्माण, विकास या भूमि संबंधी गतिविधि की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अशोक कुमार वर्मा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को वन भूमि का सीमांकन कराने का निर्देश दिया था, लेकिन 12 वर्ष बाद भी यह कार्य पूरा नहीं हो सका।
अदालत ने कहा कि राज्य सरकार यदि समय पर कार्रवाई नहीं करती तो इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए वन भूमि की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
हाईकोर्ट ने जिन गांवों में रोक लगाने का आदेश दिया है, उनमें कुराली, नाड़ा, परो, जंडपुर, सैंनियां, माजरी, छोटा नांगल, बड़ा नांगल, गढ़ा, सिंह भगवंत, भैंरो माजरा, ढकोली, बड़ौरा, गरंग, झिंगरा आदि शामिल हैं।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जिन लोगों ने वन भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण किया है, उन्हें इसका कोई लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने पंजाब के मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि वन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम गठित कर वन भूमि का सीमांकन कराया जाए।
साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि 1980 के वन (संरक्षण) अधिनियम लागू होने के बाद अतिक्रमित वन भूमि को वैध नहीं माना जा सकता और न ही उस पर किसी प्रकार का निर्माण या हस्तांतरण किया जा सकता।