
डेढ़ साल से बंद खदान में जल्द शुरू होगा उत्पादन, पांच साल में 7,700 टन नमक निकालने का लक्ष्य; खाद्य उपयोग के लिए होगी गुणवत्ता जांच
मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की द्रंग स्थित गुम्मा नमक खदान से निकलने वाला चट्टानी नमक अब देश के खाद्य बाजार तक पहुंचाने की तैयारी है। करीब डेढ़ साल से बंद खदान में दोबारा उत्पादन शुरू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड की नई खनन योजना को भारतीय खान ब्यूरो से मंजूरी मिलने के बाद अब आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
इस परियोजना की खास बात यह है कि गुम्मा की खदान से निकलने वाले चट्टानी नमक को केवल खनन उत्पाद तक सीमित न रखकर खाद्य उपयोग के योग्य बनाने की योजना है। इसके लिए नमक की गुणवत्ता की जांच, प्रसंस्करण और विपणन की व्यवस्था विकसित करने पर काम किया जाएगा। केंद्रीय नमक एवं समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान की ओर से भी नमक से संबंधित अध्ययन और परीक्षण किए जाने हैं। निर्धारित गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद ही इसे खाद्य उत्पाद के रूप में बाजार में उतारा जा सकेगा।
स्वीकृत खनन योजना के तहत अगले पांच वर्षों में करीब 7,700 टन चट्टानी नमक निकालने का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआत में खनन क्षेत्र को सुरक्षित तरीके से खोलने के बाद स्वीकृत तकनीकी डिजाइन के अनुसार उत्पादन किया जाएगा।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति
गुम्मा खदान में उत्पादन बहाल होने से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। खनन और ढुलाई के अलावा भविष्य में प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन से जुड़े कार्यों में भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। यदि नमक को खाद्य उपयोग के लिए तैयार करने की योजना सफल रहती है, तो मंडी के इस प्राकृतिक संसाधन को देश के बाजार में नई पहचान मिल सकती है।
हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड के मैनेजर प्रेम रंजन सिंह के अनुसार, खनन योजना में बदलाव और तकनीकी डिजाइन में संशोधन के कारण उत्पादन बंद था। अब नई योजना को मंजूरी मिल गई है और कामकाज की व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नियमानुसार उत्पादन शुरू किया जाएगा।