
हिमाचल प्रदेश/पंजाब। हिमाचल प्रदेश और पंजाब के 2.48 लाख से अधिक निवेशकों से जुड़े कथित क्रिप्टो घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच तेज कर दी है। करीब 500 करोड़ रुपये के इस मामले में आरोपियों से जुड़ी संपत्तियों, बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट की जांच की जा रही है। जांच के तहत करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्तियां फ्रीज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच एजेंसियां कोर्वियो और DGT कॉइन जैसी कथित डिजिटल मुद्राओं के माध्यम से जुटाई गई रकम से जुड़े संदिग्ध लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 219 मिलियन अमेरिकी डॉलर के लेनदेन जांच के दायरे में हैं। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कमर्शियल कॉम्प्लेक्स जुनेजा स्क्वायर सहित कुछ संपत्तियों, बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट से जुड़ी परिसंपत्तियों पर अंतरिम कुर्की की कार्रवाई भी की है।
इस मामले में निवेशकों के लिए अहम बात यह है कि संपत्तियां फ्रीज या कुर्क होने से उनका पैसा तुरंत वापस नहीं मिलेगा। रकम की वापसी कानूनी प्रक्रिया और अदालत के आदेश पर निर्भर करेगी। PMLA की धारा 8(8) के तहत विशेष अदालत निर्धारित शर्तों के अधीन वैध दावेदारों को संपत्ति या रकम लौटाने का आदेश दे सकती है।
निवेशकों को अपने बैंक स्टेटमेंट, भुगतान की रसीदें, ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और निवेश से जुड़े अन्य दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए। जरूरत पड़ने पर ये दस्तावेज जांच एजेंसी के समक्ष दावे और निवेश के प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
जांच में तकनीकी प्रबंधन से जुड़े मिलन गर्ग पर डेटा विदेशी सर्वरों पर स्थानांतरित करने और मुख्य आरोपी बताए जा रहे सुभाष शर्मा पर हवाला के जरिए दुबई में रकम भेजने के आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीआई के माध्यम से इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है।
फिलहाल मामले में जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ आरोप अदालत में साबित होना बाकी है। निवेशकों को रकम वापसी के संबंध में किसी भी अपुष्ट दावे पर भरोसा करने से बचना चाहिए और आधिकारिक जांच तथा कानूनी प्रक्रिया की जानकारी पर ही ध्यान देना चाहिए।