
ट्रैफिक के साथ अब पंजाब-हरियाणा की पराली भी बनी चिंता; 5 और 6 नवंबर को भी 20 फीसदी के आसपास रह सकता है पराली का योगदान
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर की हवा में प्रदूषण का संकट और गहराने की आशंका है। राजधानी में ट्रैफिक को प्रदूषण का सबसे बड़ा स्थानीय स्रोत माना जा रहा है, लेकिन अब पड़ोसी राज्यों में जल रही पराली का धुआं भी दिल्ली की हवा को जहरीला बना रहा है। ताजा सोर्स अपोर्शनमेंट बुलेटिन के मुताबिक, पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण का योगदान 3 नवंबर को 8.2 फीसदी था, जो 4 नवंबर को बढ़कर 20.2 फीसदी होने का अनुमान है। यानी एक ही दिन में इसमें करीब ढाई गुना बढ़ोतरी हो सकती है।
बुलेटिन के अनुसार, 5 नवंबर को पराली का योगदान 18.3 फीसदी और 6 नवंबर को फिर 20.2 फीसदी रहने का पूर्वानुमान है। इसका मतलब है कि दिल्ली की हवा में प्रदूषण के कुल स्रोतों में हर पांचवें हिस्से के लिए पराली का धुआं जिम्मेदार हो सकता है।
दिल्ली के भीतर प्रदूषण के स्रोतों में ट्रैफिक सबसे आगे बना हुआ है। अनुमान के मुताबिक, 3 नवंबर को ट्रैफिक का योगदान 17.8 फीसदी था, जो 4 नवंबर को 15.5 फीसदी, 5 नवंबर को 16.3 फीसदी और 6 नवंबर को 16.7 फीसदी रह सकता है।
इसके अलावा रिहायशी गतिविधियों का योगदान 3.8 से 4.4 फीसदी, उद्योगों का 2.9 से 3.3 फीसदी, निर्माण गतिविधियों का 2.2 से 2.5 फीसदी, कचरा जलाने का 1.3 से 1.5 फीसदी और सड़क की धूल का 1.1 से 1.3 फीसदी रहने का अनुमान है। ऐसे में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए दिल्ली के स्थानीय स्रोतों के साथ पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाना भी जरूरी होगा।
पड़ोसी जिलों के आंकड़ों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। झज्जर का योगदान 3 नवंबर को 9.9 फीसदी था, जो 4 नवंबर को 7 फीसदी और 6 नवंबर तक घटकर 5.9 फीसदी होने का अनुमान है। इसके उलट सोनीपत का योगदान 3 नवंबर के 2.8 फीसदी से बढ़कर 5 नवंबर को 4.9 और 6 नवंबर को 5.6 फीसदी तक पहुंच सकता है।
वहीं, गुरुग्राम का योगदान 4.4 फीसदी से घटकर 1.9 फीसदी और भिवानी का 2.2 फीसदी से घटकर 0.3 फीसदी रहने का अनुमान है। रोहतक का योगदान 2.3 फीसदी से बढ़कर 3.7 फीसदी तक पहुंच सकता है।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पराली जलाने के मामलों को लेकर पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि 26 अक्तूबर से 1 नवंबर के बीच पंजाब में पराली जलाने की 933 घटनाएं दर्ज की गईं। वहीं, 24 से 31 अक्तूबर के बीच तरनतारन में 271 एफआईआर दर्ज होने की बात कही।
सिरसा ने सवाल उठाया कि किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मशीनें और सहायता देने के बजाय उनके खिलाफ मुकदमे क्यों दर्ज किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, 1 नवंबर को पंजाब में खेतों में आग लगने के 175 मामले सामने आए, जबकि हरियाणा में सात और दिल्ली व उत्तर प्रदेश में कोई मामला दर्ज नहीं हुआ।
उन्होंने पराली प्रबंधन योजना के तहत पंजाब को वर्ष 2018-19 से 2025-26 तक मिले 2,056.50 करोड़ रुपये के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। सिरसा ने यह भी दावा किया कि 2 नवंबर तक दिल्ली में 220 दिन वायु गुणवत्ता अच्छी, संतोषजनक या मध्यम श्रेणी में रही। प्रदूषण नियंत्रण अभियान के पहले दिन 14,930 वाहनों की जांच कर 68.4 लाख रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी भी दी।
अब दिल्ली की हवा को साफ रखने की चुनौती केवल राजधानी के भीतर प्रदूषण नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है। पराली के बढ़ते अनुमानित योगदान ने पंजाब और हरियाणा में प्रभावी रोकथाम की जरूरत को भी फिर से सामने ला दिया है।

